पंजाब- गर्वनर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर कोई स्पष्टीकरण चाहते हैं तो मेरे अफसरों को नहीं मुझे तलब करें : सीएम अमरेंदर

चंडीगढ़ । पंजाब के गर्वनर वीपी सिंह बदनौर और सीएम  कैप्टन अमरेंद्र सिंह कानून व्यवस्था के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए गर्वनर द्वारा प्रदेश के मुख्य सचिव व पुलिस निदेशक को तलब करने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सीएम ने कहा कि अगर गर्वनर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर कोई स्पष्टीकरण चाहते हैं तो मेरे अफसरों को नहीं बल्कि मुझे तलब करें। सीएम ने कहा कि राज्य में अमन-कानून की व्यवस्था के पतन संबंधी भाजपा का झूठा प्रचार खेती कानूनों के मसले और किसानों के आंदोलन से ध्यान हटाने के हथकंडे से अधिक कुछ भी नहीं। मुख्यमंत्री ने भाजपा की तरफ से मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाने की कुछ घटनाओं को अमन-कानून की समस्या बता कर किसानों के शांतमयी आंदोलन को कमजोर करने की शातिर और घटिया साजिश करार दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षतिग्रस्त हुए टावरों की मुरम्मत तो की जा सकती है और की भी जा रही है, परंतु दिल्ली की सरहदों, जहां किसानों द्वारा केंद्र की भाजपा सरकार के हठधर्मी रवैये के विरुद्ध अपना हक लेने के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है, कड़ाके की ठंड में जान गंवा चुके किसान वापस नहीं आ सकते। उन्होंने इस बात पर हैरानी जाहिर की कि किसी भी भाजपा नेता ने प्रदर्शनकारी किसानों, जिनमें से कुछ ने खुदकुशी कर ली थी, पर चिंता जाहिर नहीं की। उन्होंने कहा कि खो चुकी जिंदगियां फिर इस जहान में वापस नहीं आ सकतीं। उन्होंने पंजाब भाजपा के नेताओं को अपनी घटिया टिप्पणियों के साथ शांतमयी आंदोलन पर राजनीति न करने के लिए कहा। सीएम ने कहा कि किसानों के माथे पर नक्सली, खालिस्तानी जैसे शब्दों का कलंक लगाने की बजाय भाजपा को भारत सरकार में अपनी केंद्रीय लीडरशिप पर अन्नदाताओं की आवाज श्रवण और काले खेती कानून रद्द करने के लिए दबाव डालना चाहिए क्योंकि ये कानून किसान भाइयों के जीवन और भविष्य के लिए खतरा बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों का अस्तित्व तक दाव पर लगा हुआ है और भाजपा नेता घटिया राजनीति करने पर उतरे हुए हैं और यहां तक कि उन्होंने राज्यपाल के संवैधानिक पद को भी इस बेतुके एजैंडे में खींच लिया।
सीएम ने भाजपा के हथकंडों के आगे गर्वनर द्वारा झुक जाने को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि अमन-कानून की व्यवस्था बारे भाजपा नेता की शिकायत पर गर्वनर ने सिर्फ एक दिन में ही प्रतिक्रिया दे दी जो विधानसभा में भाजपा को छोड़ कर सभी राजनीतिक पार्टियों द्वारा पेश किए गए प्रांतीय संशोधन बिलों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने में लगाई गई लंबी देरी के बिल्कुल उलट है। कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने भाजपा की पंजाब इकाई की तरफ से कांग्रेस द्वारा पंजाब में लोकतंत्र पर किए हमले के दोषों को शर्मनाक कार्रवाई बताया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, ‘एक पार्टी जिसने देश के प्रत्येक लोकतांत्रिक संस्थान को लगभग नष्ट कर दिया हो, उसे किसी और को अलोकतांत्रिक बताने का कोई हक नहीं।’ जाखड़ ने गर्वनर द्वारा प्रदेश मुख्य सचिव व पुलिस निदेशक को तलब करने के फैसले को गैर-जरूरी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि गर्वनर को याद रखना चाहिए कि पंजाब पश्चिम बंगाल या पुड्डुचेरी नहीं है। उन्होंने गर्वनर के प्रदेश के मामलों में बिना किसी कारण दखल दिए जाने की आलोचना करते हुए कहा था कि कांग्रेस संवैधानिक पदों की स्वायत्तता की समर्थक रही है लेकिन गर्वनर प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में बिना वजह दखल दे रहे हैं, जो अस्वीकार्य है। 

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