पांच साल से बिना बिजली-पानी के चल रही हैं आंगनवाड़ियां

पांच साल से बिना बिजली-पानी के चल रही हैं आंगनवाड़ियां
आयोग ने मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव से एक माह में मांगा प्रतिवेदन

भोपाल शहर में संचालित कई आंगनवाड़ी केंद्रों में पांच साल बाद भी न तो पानी की व्यवस्था हो पाई है और न ही बिजली के कनेक्शन लग पाये हैं। इनके भवन तो रंग-रोशन कर आकर्षक बना दिये गये, लेकिन अब भी पीने के पानी का इंतज़ाम केन्द्र के आस-पास के रहवासियों से मांगकर ही करना पड़ रहा है। इनके भवन के ऊपर रखी पानी की टंकी शो-पीस बनी हुई है। इस मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन ने मुख्य सचिव, म.प्र. शासन, प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा प्रोजेक्ट आॅफिसर, महिला एवं बाल विकास विभाग, भोपाल से एक माह में प्रतिवेदन मांगा है।
उल्लेखनीय है कि भोपाल शहर के भवानीधाम स्थित शांति नगर में 2015 में आंगनवाड़ी केन्द्र बनाया गया था। पहले यह केन्द्र किराये के भवन से संचालित होता था। यहां 100 से ज़्यादा बच्चे आते हैं, लेकिन पांच साल बाद भी यहां समीप की बस्ती से ही पानी लाना पड़ रहा है। इस केन्द्र में बिजली कनेक्शन भी नहीं है। स्विच बोर्ड और वायरिंग भी उखड़ने लगी है। यहां आने वाले बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि आंगनवाड़ी केन्द्र तो व्यवस्थित हो गये, लेकिन बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।
इसी प्रकार भोपाल शहर के ही वार्ड नं. 68 में झील नगर के सामने नगर निगम द्वारा 2017 में एक आंगनवाड़ी केन्द्र बनाया गया। यहां 130 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बिजली-पानी जैसी सुविधाएं नहीं हैं। पानी भी पास की बस्ती से लाना पड़ता है। आंगनवाड़ी की कर्मचारी केन में पानी भरकर लाती हैं। भवन की दीवार के सहारे तबेला चल रहा है। इसकी दुर्गंध से आंगनवाड़ी में महिलाओं-बच्चों को बेहद परेशानी होती है। आंगनवाड़ी में बच्चों के लिये पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। पास में तबेला होने से मवेशी बांधे जाते हैं। ऐसे में यहां आने वाले बच्चे दुर्गंध से बीमार हो सकते हैं।

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