कोरोना टीकाकरण में लीडर बन गए दुनिया के ये तीन छोटे देश

नई दिल्ली । कोरोना टीकाकरण में दुनिया के तीन छोटे देश लीडर बनकर मिसाल पेश कर रहे हैं। दुनियाभर में हो रहे टीकाकरण पर नजर रखने वाली संस्था ‘आवर वर्ल्ड इन डेटा’ ने यह दावा किया है। इसके मुताबिक, दुनिया में सबसे तेजी से टीकाकरण कराने में इजरायल नंबर एक पर है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन अपने यहां सबसे तेजी से टीकाकरण करा रहे हैं। इन तीनों देशों की आबादी एक करोड़ से कम है। मध्यपूर्व में स्थित इजरायल की आबादी 88.8 लाख है और यह 15.83 प्रतिशत आबादी को टीका लगा चुका है। 19 दिसंबर को यहां फाइजर-बायोएनटेक के कोरोना वैक्सीन से टीकाकरण शुरू हुआ था। आवर वर्ल्ड इन डाटा के मुताबिक, चार जनवरी तक 15.83 फीसदी आबादी को टीका लग गया, यानी 16 दिन में 16 प्रतिशत आबादी को टीका लग गया। यहां 13.7 करोड़ खुराकों से टीका लगाया जा रहा है। प्रति दस लाख आबादी में टीकाकरण के हिसाब से भी यह देश दुनिया की सूची में शीर्ष पर है। चार जनवरी के डाटा के मुताबिक, यहां प्रति दस लाख आबादी पर 14,498 लोगों को टीका लगा। इस पश्चिम एशियाई देश की आबादी 96.3 लाख है, जिसमें से 8.35 प्रतिशत आबादी को टीका लग चुका है। आवर वर्ल्ड इन डाटा के मुताबिक, इजरायल के बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से टीकाकरण कराने वाला देश है। यहां चीन की कोरोना वैक्सीन सिनोफार्म और फाइजर-बायोएनटेक से टीकाकरण कराया जा रहा है। यहां 8.26 लाख टीकों के साथ टीकाकरण हो रहा है आबादी के हिसाब से एशिया के तीसरे सबसे छोटे देश बहरीन ने टीकाकरण में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। 15.7 लाख आबादी वाले इस देश में चार जनवरी तक 3.75 फीसदी आबादी को टीका लगाया जा चुका है। यहां आठ दिसंबर को चीन की कोरोना वैक्सीन सिनोफार्म से टीकाकरण की शुरुआत की गई थी। फिर फाइजर-बायोएनटेक के टीके से भी टीकाकरण शुरू हो गया। अब यहां एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड के टीके को भी मंजूरी मिल गई है। पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित लगभग 18 हजार की आबादी वाले पलाऊ रिपब्लिक में कोरोना संक्रमण का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया। फिर भी इस देश में बीते करा दिया। पहले चरण में यह 2800 खुराकों से टीकाकरण करा रहा है। पलाऊ ने पिछले साल की जनवरी से अपनी सीमाओं पर नियंत्रण करना शुरू कर दिया था। मार्च तक इस देश ने अपनी सीमाओं को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद देश ने कोरोना के परीक्षण शुरू किए और अप्रैल तक सभी निवासी इस संक्रमण से निगेटिव पाए गए।
