धर्मांतरण विरोधी कानून पर सुनवाई अब दो फरवरी

प्रयागराज । धर्मानंतरण प्रतिबंधित करने के लिए उत्तर प्रदेश में बने कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई अब दो फरवरी को होगी। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की खंडपीठ ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण दिया है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सभी याचिकाओं को स्थानांतरित कर एक साथ सुने जाने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है, जिसकी सुनवाई शीघ्र होगी इसलिए अर्जी तय होने तक सुनवाई स्थगित की जाए। गौरतलब है कि राज्य सरकार की तरफ से याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल किया जा चुका है। याचिकाओं में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश को संविधान के खिलाफ और गैर जरूरी बताते हुए चुनौती दी गई है। कहा गया है कि यह कानून व्यक्ति की अपनी पसंद व शर्तों पर किसी भी व्यक्ति के साथ रहने व धर्मध्पंथ अपनाने के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसलिए इसे रद्द किया जाए क्योंकि इस कानून का दुरुपयोग किया जा सकता है। राज्य सरकार का कहना है कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन से कानून व्यवस्था व सामाजिक स्थिति खराब न हो इसके लिए कानून लाया गया है। जो पूरी तरह संविधान सम्मत है। इससे किसी के मूल अधिकारों का हनन नहीं होता, बल्कि नागरिक अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे छल-छद्म के जरिए धर्मानंतरण पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है।
