पांच वर्ष के अनुभव वाले वकील भी अब कोर्ट में बन सकेंगे मध्यस्थ

भोपाल।अब पांच वर्ष का अनुभव रखने वाले वकील भी कोर्ट में मध्यस्थ बन सकेंगे। एमपी हाईकोर्ट ने इस संबंध में नया प्रावधान कर दिया है जो आगामी 2 जनवरी के बाद लागू हो जायेगा। ज्ञातव्य है कि मप्र मध्यस्थता नियम 2016 के तहत समस्त सिविल तथा शमनीय आपराधिक मामलों की मुकदमेबाजी के दौरान कोर्ट के आदेश पर मध्यस्थों का पैनल नियुक्त किया जाता है। इस नियम में पहले प्रावधान था कि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट या जिला न्यायालय या समतुल्य हैसियत के स्तर पर बार में कम से कम 10 वर्ष तक स्थाई विधि व्यवसायी यानि वकील मध्यस्थ बन सकेगा। लेकिन अब इस प्रावधान में संशोधन कर पांच वर्ष तक वकील रहा व्यक्ति कर दिया गया है।
यह मिलेगा पारिश्रमिक :
मध्यस्थों को नियम के तहत निर्धारित पारिश्रमिक भी मिलेगा। वैवाहिक मामलों, अभिरक्षा संरक्षकत्व, प्रोबेट, विभाजन और कब्जे में मध्यस्था से समझौता होने पर 3 हजार रुपये प्रति प्रकरण (दो या अधिक सम्बध्द मामलों में अधिकतम 4 हजार रुपये), समस्त अन्य मामलों में 2 हजार रुपये प्रति प्रकरण (दो या अधिक संबध्द मामलों में अधिकतम 3 हजार रुपये), सम्बध्द प्रकरण में 500 रुपये प्रति प्रकरण (अधिकतम 1 हजार रुपये) तथा समझौता नहीं होने पर मानदेय एक हजार रुपये (सम्बध्द प्रकरणों की संख्या ध्यान में रखे बिना) दिया जायेगा।
