गड़बड़झाले पर लगेगी लगाम, भोपाल से होगी मॉनिटरिंग

भोपाल । प्रदेश की साढ़े चार हजार सहकारी समितियों के गड़बड़झाले पर अब लगाम लग सकेगी। वन क्लिक में सारी संस्थाओं की पूरी कुंडली सामने होगी। भोपाल में प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार और अपेक्स बैंक स्तर से इसकी मानीटरिंग की जा सकेगी। प्रदेशभर में चार हजार 526 सहकारी संस्थाएं कार्यरत है। गांव स्तर तक फैली इन प्राथमिक सहकारी संस्थाओं में जमकर गड़बडिय़ां होती है। समय पर वसूली नहीं हो पाने के कारण ये संस्थाएं डिफाल्टर हो रही है। मानीटरिंग की व्यवस्था नहीं होने से इन गड़बडिय़ों पर लगाम नहीं लग पा रही है। अब राज्य सरकार इन सभी प्राथमिक सहकारी संस्थाओं का कम्प्यूटराईजेशन करने जा रही है। दो साल के भीतर सभी सहकारी संस्थाओं का कम्प्यूटराईजेशन कार्य किया जाना है। इसके लिए राज्य सरकार ने सत्तर करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस साल के बजट में इसके लिए बीस करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया जा रहा है। बीस करोड़ रुपए अगले साल दिए जाएंगे। साथ ही राज्य सरकार ने डाटा संग्रहण के लिए स्टेट डॉटा सेंटर और डिजास्टर सेंटर का उपयोग करने की अनुमति दी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी हाईपावर कमेटी कम्प्यूटराईजेशन का काम करने वाली संस्था तय करेगी। इसके बाद वित्त सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इसके लिए बजट रिलीज करेगी।
गड़बडिय़ों पर तुरंत एक्शन
कम्प्यूटराईजेशन के बाद प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार, अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंक स्तर पर कहीं से भी सहकारी संस्थाओं की मानीटरिंग की जा सकेगी। गड़बड़ी दिखाई देने पर तुरंत संबंधित दोषी अधिकारी, कर्मचारी या समिति सदस्य के खिलाफ कार्यवाही की जा सकेगी। गड़बड़ी रोकने के लिए जरुरी कदम उठाए जा सकेंगे।
इन गतिविधियों पर नजर
संस्थाओं द्वारा बांटे गए कर्ज की स्थिति, संस्थाओं में जमा राशि की स्थिति, कितने क्रेडिट कार्ड बनाए गए, संस्था के कितने सदस्य है इसकी जानकारी भी ऑनलाईन देखी जा सकेगी। पीडीएस वितरण और स्टाक की स्थिति, खाद स्टाक और विक्रय की जानकारी, कितना कर्ज बांटा, कितना वसूलना बाकी यह जानकारी भी मिलेगी।
