नासा के मंगल में भारतीय मूल की स्‍वाती मोहन ने रचा कीर्तिमान

नई दिल्‍ली । अमेरिका के प्रसिद्ध अंतरिक्ष संस्थान नासा ने अपने महत्‍वाकांक्षी मिशन के तहत मंगन ग्रह पर शोध के लिए रोवर परसिवरेंस को भेजा है। यह शोध यान मंगल की सतह पर उतरने में सफल रहा है। रोवर परसिवरेंस को मंगल तक पहुंचाने में वैज्ञानिकों की बड़ी टीम ने काम किया है। इसी टीम में एक भारतीय अमेरिकी मूल की महिला वैज्ञानिक भी हैं। उनका नाम डॉ. स्‍वाति मोहन है। उन्‍होंने पूरे मिशन में एटीट्यूड कंट्रोल और रोवर के लैंडिंग सिस्‍टम पर काम किया है। स्‍वाति मोहन इससे पहले भी नासा के कई मिशन में शामिल हो चुकी हैं।
जानकारी के मुताबिक डॉ. स्‍वाति मोहन जब एक साल की थीं तभी वह भारत से अमेरिका चली गई थीं। उन्‍होंने अपना अधिकांश बचपन वाशिंगटन डीसी के मेट्रो एरिया उत्‍तरी वर्जीनिया में बिताया है। जब वह 9 साल की थीं तब उन्‍होंने पहली बार साइंस फिक्‍शनल फिल्‍म स्‍टार ट्रेक देखी थी। इससे वह अंतरिक्ष को लेकर खूब प्रभावित हुई थीं। वह भी ऐसा करना चाहती थीं और अंतरिक्ष की गहराइयों में नई चीजें खोजना चाहती थीं। वह 16 वर्ष की उम्र तक बाल रोग विशेषज्ञ बनना चाहती थी। हालांकि, उन्‍होंने इंजीनियरिंग करने की ठानी। डॉ. मोहन ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और एयरोनॉटिक्स/एस्ट्रोनॉटिक्स में एमआईटी से एमएस और पीएचडी पूरी की। बता दें कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने गुरुवार देर रात करीब 2.30 बजे अपने मार्स पर्सिवरेंस रोवर को जेजेरो क्रेटर में सफलतापूर्वक लैंड कराया। छह पहिए वाला यह रोवर मंगल ग्रह पर उतरकर वहां पर कई तरह की जानकारी जुटाएगा और ऐसी चट्टानें लेकर आएगा, जिनसे इन सवालों का जवाब मिल सकेगा कि क्या कभी लाल ग्रह पर जीवन था।
 

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