​​​​​​​पहचानें अपने भीतर छुपी हुई प्रतिभा, सफलता खुद चूमेगी कदम

इंगलैंड के एक गांव में चर्चिल नाम का बालक रहता था। उसका मन स्कूल में बिल्कुल नहीं लगता था। वह ज्यादातर समय अपने घर के अहाते में रेत और पत्थरों से युद्ध का मैदान बनाकर सेना को तैनात करने का चक्रव्यूह रचा करता था। उसके घर वाले इन हरकतों से बहुत परेशान थे। एक दिन इंगलैंड के सेनापति उसके घर आए। घर के परिसर में चर्चिल के युद्ध का मैदान देखकर वह पूछ बैठे, ''बेटा, अगर शत्रु ने पूर्व दिशा से आक्रमण कर दिया तो तुम क्या करोगे?''

चर्चिल बोला, ''आपने ध्यान से नहीं देखा, इसके बाईं तरफ नदी है। उस बने पुल को काट दिया जाएगा तो शत्रु वहीं धरा रह जाएगा।''

सेनापति ने फिर पूछा, ''अगर सेना ने उत्तर दिशा से आक्रमण कर दिया तो क्या होगा?''

बालक बोला, ''आप समझने की कोशिश कीजिए। इस रास्ते से जैसे ही सेना लौटेगी, यहां पर तैनात तोपें बारूद उगलना शुरू कर देंगी।''

सेनापति बालक की इस बात से बहुत प्रभावित हुए। वह उसके पिता से बोले, ''आपके घर हीरे ने जन्म लिया है। मैं इस हीरे को तराश कर मुकुट में लगाने योग्य बना दूंगा। यह मेरा वायदा है।''

बालक के पिता बौखलाकर बोले, ''जिस बालक को आप हीरा समझकर तराशना चाहते हैं वह तो सारे मोहल्ले में झगड़ा करता रहता है। यह किसी योग्य नहीं बन पाएगा, मुझे संदेह है।''

सेनापति ने कहा, ''आप केवल इसको मेरे सुपुर्द कर दें, बाकी कार्य मेरा है।''

सेनापति की बात मानकर बालक के पिता ने बालक को उनके संरक्षण में छोड़ दिया। कुछ सालों के बाद सेनापति उसी बालक को लेकर उसके पिता के पास आए और बोले, ''आपका बेटा आज इंगलैंड की सेना का सर्वश्रेष्ठ सैनिक है। आप उसकी प्रतिभा को पहचान न सके।''

 

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