बाल आयोग ने उठाई एसआईटी पर उंगलियां

भोपाल ।  राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बहुचर्चित प्‍यारे मियां यौन शोषण कांड व पीड़ितों में से एक बच्ची की मौत के मामले मेंअपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बच्ची की मौत के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठाई है। साथ ही आयोग ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस व बालिका संरक्षण गृह प्रबंधन की मामले को लेकर संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। आयोग ने एसआइटी के सदस्यों को बाल उत्पीड़न व पोक्सो एक्ट के प्रति गंभीर नहीं होना बताकर ऐसे अधिकारियों को जांच टीम में शामिल नहीं करने तक की अनुशंसा की है।अपनी रिपोर्ट में आयोग ने एसआइटी के सदस्य डीएसपी उमेश तिवारी की भूमिका, मामले में उनके जांच के तरीके और बाल उत्पीड़न व पोक्सो एक्ट को लेकर उनकी जानकारी पर सवाल खड़े किए हैं। आयोग ने कहा है कि तिवारी ने जान-बूझकर जांच में शिथिलता बरतकर आरोपित को लाभ पहुंचाने की कोशिश भी की है। आयोग ने डीजीपी से तिवारी को तत्काल टीम से हटाने की अनुशंसा की है। इसके अलावा आयोग ने दुष्कर्म मामले में जांच कर रही स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर भी संदेह जताते हुए कहा कि संबंधित थाने की पुलिस ने समय से सक्षम न्यायालय में चालान पेश नहीं किया। इससे कोर्ट की कार्रवाई में विलंब हुआ। यहां तक कि प्यारे मियां पर बालश्रम कानून के तहत भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जबकि प्यारे मियां और उसके घर के सदस्य बच्चियों से बालश्रम करवाते थे। इसके लिए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए। आयोग ने रिपोर्ट में बताया कि डेढ़ साल पहले इसी बालिका गृह का निरीक्षण किया गया था और उसके बाद व्यवस्थाओं में सुधार की अनुशंसाएं की गईं थीं, उन पर भी अब तक पालन नहीं किया गया। इसका नतीजा ही बच्ची की मौत के रूप में सामने आया। घटना के बाद जब आयोग की टीम बालिका गृह पहुंची, तो उस दौरान 15 जनवरी 2021 के सीसीटीवी फुटेज गायब पाए गए। इससे बालिका गृह प्रबंधन की भूमिका संदेह के घेरे में आती है। वहीं जिन परिस्थितियों में बच्ची की मौत हुई, उसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ संबंधित विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने बालिका गृह की व्यवस्थाओं और पीड़ित बच्चियों की उचित देखरेख पर ध्यान नहीं दिया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पीड़ित बच्चियों को संपूर्ण मुआवजा देने की सिफारिश करते हुए कहा कि बच्चियों की उचित देखरेख और जीवन-यापन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।मालूम हो कि प्यारे मियां ने जिन छह बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया था, उन्हें सुरक्षा व बेहतर देखभाल की दृष्टि से नेहरू नगर स्थित बालिका संरक्षण गृह में रखा गया था। जनवरी में नींद की ज्यादा गोलियां खा लेने से इनमें से एक बच्ची की मौत हो गई थी। इसकी जांच के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम 21 जनवरी को भोपाल आई थी, वहीं राज्य शासन ने भी महिला अपराध शाखा में पुलिस महानिरीक्षण दीपिका सूरी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया था। 

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