सामान्य से 86 फीसदी तक हुई कम बारिश,दिल्लीवालों पर प्रदूषण और गर्मी की दोहरी मार

नई दिल्ली | दिल्ली में सामान्य से कम बारिश होने के चलते लोगों को सामान्य से ज्यादा गर्मी और प्रदूषण की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। फरवरी के महीने में जहां सामान्य से 86 फीसदी तक कम बारिश हुई, वहीं मार्च में अभी तक सामान्य से 64 फीसदी बरसात कम हुई है। इसके चलते दिल्ली के वातावरण में धूल-गर्द की मात्रा ज्यादा है। 

दिल्ली के लिए आमतौर पर फरवरी और मार्च का महीना प्रदूषण से राहत लेकर आता है। अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर और जनवरी के चार महीने सबसे अधिक प्रदूषण वाले रहते हैं। जबकि, फरवरी महीने से लोगों को राहत भरी सांस मिलने लगती है। मौसम में बदलाव व कई पश्चिमी विक्षोभ के चलते बारिश होती है और तेज गति से हवाएं चलती हैं। इससे राजधानी के आसमान पर छाए प्रदूषक कण साफ हो जाते हैं। लेकिन, इस बार स्थितियां बदली हुई हैं।

कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के चलते दिल्ली में सामान्य से बेहद कम बरसात हो रही है। इससे हवा में धूल की मात्रा में इजाफा हुआ है। प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव के मुताबिक, अच्छी बरसात नहीं होने के चलते हरियाणा-राजस्थान आदि क्षेत्रों में मिट्टी में नमी की मात्रा कम हो गई है। इसके चलते हवा के साथ ज्यादा धूल उड़ रही है। 

इस माह एक दिन भी हवा संतोषजनक नहीं
पिछले साल मार्च महीने के 19 दिनों में चार दिन ऐसे रहे थे, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 100 से नीचे यानी संतोषजनक श्रेणी में रहा था। जबकि, इस साल मार्च के महीने में अभी तक एक भी दिन हवा संतोषजनक श्रेणी में नहीं आई है। यही नहीं, पिछले साल एक दिन भी वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के अंक के ऊपर नहीं पहुंचा था। जबकि, इस बार दो दिन ऐसे रहे हैं जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के अंक के ऊपर रही है। इससे भी हवा में प्रदूषण के स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है। 

बीते छह माह में हुई बारिश

माह                     औसत बारिश         कितनी हुई बारिश         
सितंबर 2020             125.1 मिमी.        84 फीसदी कम        
अक्तूबर 2020             28 मिमी.            100 फीसदी कम        
नवंबर 2020                5.6 मिमी.        90 फीसदी कम        
दिसंबर 2020                9.0 मिमी.        83 फीसदी कम        
जनवरी 2021                21.7 मिमी.        161 फीसदी ज्यादा    
फरवरी 2021                18.0 मिमी.        86 फीसदी कम           
मार्च 2021                    9.8 मिमी.        64 फीसदी कम        

सात छह माह में केवल जनवरी में अच्छी बरसात

बीते छह महीने में अगर बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल जनवरी महीने में सामान्य से 161 फीसदी ज्यादा बरसात हुई। लेकिन, यह बारिश भी एक-दो दिनों के बीच होने के चलते इसका फायदा लोगों को कम मिला। यानी, बारिश की मात्रा तो अधिक रही लेकिन बारिश वाले दिन कम रहे। इसके चलते लंबे समय तक मिट्टी को नमी नहीं मिल सकी। 

मार्च महीने में प्रदूषण की स्थिति 

वायु गुणवत्ता की श्रेणी       पिछले साल            इस साल
बेहद खराब                    00 दिन                02 दिन
खराब श्रेणी                    02 दिन                13 दिन
मध्यम श्रेणी                    13 दिन                04 दिन
संतोषजनक श्रेणी             04 दिन                00 दिन
(आंकड़े : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मार्च महीने के 19 दिनों का एक्यूआई)

बीते साल से तीन गुना ज्यादा प्रदूषण

पिछले साल मार्च के महीने में लगातार पश्चिमी विक्षोभ आते रहे थे। यहां तक कि पिछले साल मार्च में 109.6 मिलीमीटर बरसात हुई थी, जो सामान्य से 590 फीसदी ज्यादा है। इसके चलते पिछले साल मार्च का महीना बेहद साफ-सुथरा रहा था। हवा में प्रदूषण नहीं के बराबर था। इस बार फरवरी, मार्च में काफी कम बारिश होने से पिछले साल की तुलना में करीब तीन गुना अधिक प्रदूषण है।

 

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