भारत एक बार फिर समुद्री क्षेत्र के जरिए दुनिया का नेतृत्व करेगा

नई दिल्ली । पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने 5 अप्रैल 1919 को मुंबई से लंदन तक यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय फ्लैग मर्चेंट पोत (एम/एस सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी के स्वामित्व वाली) ‘एस. एस. लॉयल्टी’ की पहली यात्रा की याद में 58वां राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया। इस राष्ट्रीय समुद्री दिवस की थीम भारत सरकार की पहल ‘आत्म निर्भर’ भारत की तर्ज पर ‘कोविड-19 से आगे सतत नौपरिवहन’ थी। राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनसुख मांडविया ने समुद्री समुदाय को बधाई दी और कोविड महामारी के दौरान उनकी भूमिका एवं कड़ी मेहनत, उत्साह और साहस की प्रशंसा की। मांडविया ने कहा कि हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च मैरिटाइम इंडिया विजन-2030 भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए अगले दशक का व्यापक दृष्टिकोण है और फोकस अप्रोच के साथ भारत का समुद्री क्षेत्र जल्द ही मजबूत, तकनीकी रूप से उन्नत और आत्म निर्भर बन जाएगा। मांडविया ने सकारात्मक विचार के साथ अपनी बात खत्म की और कहा, ‘भारत बदल रहा है, भारत आगे बढ़ रहा है, नए भारत का निर्माण उसी प्रकार हो रहा है जैसे हम अतीत में समुद्री नेता थे, भारत एक बार फिर समुद्री क्षेत्र के जरिए दुनिया का नेतृत्व करेगा। मांडविया ने 58वें राष्ट्रीय समुद्री दिवस की स्मारिका के रूप में ई-मैगजीन लॉन्च की और राष्ट्रीय समुद्री दिवस सेलिब्रेशन समिति द्वारा स्थापित पुरस्कार प्रदान किए। इस समिति की अध्यक्षता पोत परिवहन के महानिदेशक द्वारा की जाती है। 
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव डॉ. संजीव रंजन ने कहा कि कोविड के समय में समुद्री समुदाय ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मंत्रालय नीतियों में प्रगतिशील परिवर्तन लाने के लिए दिन रात काम कर रहा है ताकि भारत को समुद्री समुदाय में नेतृत्व का स्थान मिल सके।

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