वैक्सीनेशन के लिए तैयार नहीं लोग, माइक थाम मंत्री उतरीं सड़क पर, कहा- कोरोना से डरना नहीं है, लड़ना है

देवास. कोरोना वैक्सीनेशन के लिए अभी भी लोग जागरूक नहीं हैं. ऐसे में पर्यटन मंत्री ऊषा ठाकुर खुद माइक लेकर सड़कों पर उतर गई हैं. देवास की प्रभारी और प्रदेश की पर्यटन मंत्री ऊषा ठाकुर ने मंगलवार को देवास जिले का दौरा किया. उन्होंने वैक्सीनेशन सेंटर का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखीं. इसके बाद वे ग्रामीण इलाकों में गईं और बाकायदा माइक लेकर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया.उन्होंने कहा कि कोविड से बचाव के लिए ज्यादा वैक्सीनेशन जरूरी है. इस दौरान उन्होंने सोनकच्छ के भौरांसा गांव में वैक्सीनेशन सेंटर पर डॉक्टर और नर्स उपलब्ध करवाने की बात भी कही. दरअसल, यहां वैक्सीनेशन करवाने के लिए लोगों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. मंत्री उषा ठाकुर का कहना है कि अगर डरोगे तो मरोगे, डरना बिल्कुल भी नहीं है, हम को मिलकर लड़ना है.
स्टाफ की कमी पूरी की जाएगी- ठाकुर
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह वैक्सीनेशन सेंटर बनाए गए हैं, लेकिन लोग अभी भी वैक्सीन के प्रति जागरूकता नहीं दिखा रहे. देवास जिले में 38 से ज्यादा वैक्सीनेशन सेंटर बनाए गए हैं, जहां स्टाफ की कमी है. इस दौरान गांववालों ने मंत्री को स्टाफ की कमी के बारे में बताया. इस पर उन्होंने स्टाफ को जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. इस दौरान वे सोनकच्छ के भौरांसा गांव भी गईं. उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव खंडेलवाल, पूर्व विधायक राजेन्द्र वर्मा व अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.
ये है एमपी की हालत
प्रदेश में लगतार दूसरे दिन 12,897 से ज्यादा कोरोना से संक्रमित मरीज मिले. सरकारी रिकॉर्ड कहता है कि एक दिन में 79 मौतें हुईं, जबकि श्मशान के आंकड़े बताते हैं कि इससे कहीं ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल में हुआ. पिछले 24 घंटे में 50,942 नमूनों की जांच की गई. वहीं संक्रमण दर 25.3% दर्ज की गई. पिछले 24 घंटों में 6836 लोग यानी 50% से ज्यादा लोग ठीक भी हुए हैं.
भोपाल में जल रहीं लाशें
भोपाल में एक ही दिन में 123 संदिग्ध कोरोना मरीजों की मौत हुई. इन शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया. सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 5 लोगों की मौत बताई गई. शहर के मुख्य विश्राम घाट और कब्रिस्तान से मिले आंकड़ों के अनुसार 19 अप्रैल को 123 शवों के अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किए गए. सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार भदभदा विश्राम घाट में 83, सुभाष विश्राम घाट में 32 के किए गए. झदा कब्रिस्तान में 8 शवों को दफनाया गया. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 5 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई.
