तृतीयपंथियों की मदद कैसे हो, सरकार के पास कोई सूची नहीं

उल्हासनगर। कोरोना महामारी के संकटकाल में महाराष्ट्र सरकार किन्नरों को प्रति 1500 रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध करा सकती है. सरकार ने किन्नरों को राहत देने के लिए सकारात्मक कदम उठाया है. सरकार की तरफ से किन्नरों को आर्थिक सहायता देने के लिए राज्य के समाज कल्याण आयुक्तालय को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया है. समाज कल्याण आयुक्तालय को राज्य में किन्नरों की संख्या, मदद के लिए सरकारी तिजोरी पर पड़ने वाला आर्थिक भार और मदद करने की प्रणाली के बारे में जानकारी देने को कहा गया है. इसलिए अब समाज कल्याण आयुक्तालय के उपायुक्त रवींद्र पाटील ने समाज कल्याण विभाग के सभी प्रादेशिक उपायुक्त और सहायक आयुक्तों को पत्र लिखकर संबंधित जानकारी मांगी है. इस पत्र के जरिए विभागीय तृतीयपंथीय (किन्नर) अधिकार संरक्षण और कल्याण मंडल व जिलास्तरीय शिकायत निवारण समिति की मदद से जिलेवार किन्नरों की संख्या, मदद के लिए पड़ने वाला आर्थिक भार और मदद के लिए डीबीटी समेत अन्य विकल्पों समेत अन्य जानकारी 26 अप्रैल तक मांगी गई है, इससे पहले राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार से किन्नरों को मदद करने की मांग की थी. परंतु सबसे बड़ा सवाल ये है कि तृतीयपंथियों की मदद कैसे हो? क्योंकि सरकार के पास तृतीयपंथियों की कोई सूची बनी नहीं है. उक्त विषय पर उल्हासनगर, अंबरनाथ तथा कल्याण के 250 किन्नरों का प्रतिनिधित्व करने वाले विद्यासागर देडे ने बताया कि आजतक सरकार से कोई सहायता नहीं मिली, ना ही कोई सर्वे करने आया. वहीं सांसद सुप्रिया सुले द्वारा की गई मांग को लेकर उल्हासनगर राकांपा अध्यक्षा सोनिया धामी ने बताया कि 1 मई के बाद ठाणे जिले के जिलाधिकारी राजेश नार्वेकर से सर्वे के बारे में चर्चा की जायेगी।

Leave a Reply