जिला प्रशासन का ध्यान अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नहीं, दिन भर चलती रहती बैठकें,

जिला प्रशासन की बैठकें, भारी पड़ रही कोविड-मरीजों पर
दिन भर में पांच मरीजों की जान गई, प्रशासनिक अधिकारी, बैठकों में मगशूल
मुरैना। जिला अस्पताल में एक तरफ मौतों का सिलसिला जारी था, दूसरी तरफ जिला प्रशासन बैठक ले रहा था। सोमवार की रात आठ बजे बैठक खत्म हुई। पूरे दिन अधिकारी बैठकों में व्यस्त रहते हैं, जिससे अस्पताल व कोविड आइसोलेशन सेन्टरों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। सवाल यह है कि अगर जिला प्रशासन लापरवाही को नहीं रोक पा रहा है तो ऐसी बैठकों से क्या मतलब है?
जिला अस्पातल में वार्ड बॉय व कर्मचारियों की लापरवाही से पांच जिदंगियां खत्म हो गई। इनमें से तीन मौतें सिर्फ इसलिए हुईं कि उन्हें समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल सकी, जबकि अस्पताल में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में थी। इस पर जिला प्रशासन का ध्यान नहीं है। दूसरी तरफ जिला प्रशासन की बैठक सुबह 12 बजे से शुरु हुई और रात के 8 बजे तक चलती रही। बैठक में सिविल सर्जन व सीएमएचओ सहित जिले के सभी अधिकारी पूरी तरह व्यस्त रहे।
कब सुधरेगी जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली
अब, तो इस बात को जिला प्रशासन के अधिकारी भी दबी जुबान से स्वीकारने लगे हैं कि, आखिर कब इस घिसी-पिटी कार्यप्रणाली में सुधार आएगा? अफसर स्वयं यह कहते नजर आ रहे हैं कि अगर वे दिन भर बैठकों में ही व्यस्त रहेंगे, तो फील्ड में समय कब देंगे? अफसरों का कहना है कि वे काम करने में पीछे नहीं हैं, लेकिन एक आदमी दो जगह नहीं हो सकता है, उन्हें फ्री होल्ड कर दिया जाए तो वे अपने काम पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।
अस्पताल पर ध्यान नहीं दे पा रहे, अन्य पर कैसे दें
जिले में एकमात्र जिला अस्पताल है जिस पर अफसरों को ध्यान देना है, क्योंकि वहां कोविड मरीजों को आईसीयू में तथा वार्डों में आइसोलेट किया गया है। इस समय जिला प्रशासन व अस्पताल प्रबंधन का पूरा ध्यान कोविड मरीजों व ओपीडी में आने वाले मरीजों पर होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। पूरा प्रशासन भी मिलकर अकेेले अस्पताल का ध्यान नहीं रख पा रहा है। इसका दुष्परिणाम यह है कि, लोगों का जीवन समाप्त हो रहा है।
आईसीयू में नहीं जा रहे डॉक्टर, देखे कौन
जिला अस्पताल के कोिवड आईसीयू में चिकित्सक नहीं जा रहे हैं। यही स्थिति आइसोलेशन वार्ड की है, पूरी व्यवस्थाएं नर्सिंग स्टॉफ व वार्ड बॉय के जिम्मे हैं। इन चिकित्सकों पर मॉनीटरिंग की जम्मेदारी सिविल सर्जन तथा सीएमएचओ की है, जो पूरे दिन जिला प्रशासन की बैठकों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इस तरह कब तक काम चलेगा?
कलेक्टर से सीधी बात…
सवाल: जिला अस्पताल में उधर मौतें रही थीं और इधर आपकी दिन भर बैठक चल रही थी, जो रात 8 बजे तक चली? यह कैसी व्यवस्था है?
कलेक्टर: बैठकें भी जरूरी हैं, इन व्यवस्थाओं के लिए ही बैठकें होती हैं।
सवाल: आपके अधिकारी स्वयं इस बात को कह रहे हैं कि जब हम दिन भर बैठक में ही रहेंगे तो काम पर ध्यान कब देंगे?
जवाब: हम लोग दिन भर कोविड मरीजों के लिए ही बैठक ले रहे थे।
सवाल: रात आठ बजे तक सिविल सर्जन से बात नहीं हो सकी। जब भी उनसे बात करना चाही, उन्होंने बताया कि कलेक्टर साहब की बैठक में हैं। इस प्रकार जिम्मेदार अधिकारी कब व्यस्त रहेंगे ?
जवाब: अब, बैठक के बीच में भी जब मीडिया चाहेगी, ब्रीफिंग कर दी जाएगी।
