3 साल में गंगा सफाई का 25% काम ही पूरा; सिर्फ 18% पैसा खर्च

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पहली बार 7 नवंबर 2014 को बनारस पहुंचे थे। उन्होंने हाथ में फावड़ा उठाकर दशाश्वमेध घाट पर गंगा की सफाई का काम शुरू किया था। अब इसे तीन साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन गंगा की सफाई का काम अभी बहुत पीछे चल रहा है। मोदी की इस महात्वकांक्षी योजना के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने भी पूछा था। 14 जनवरी 2015 को हलफनामा देकर सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा था कि 2018 के अंत तक गंगा की सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। यह काम 2019 तक नहीं जाएगा। अब जबकि मोदी सरकार का कार्यकाल पूरा होने वाला है, ऐसे में भास्कर ने सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में किए गए दावे की पड़ताल की तो पाया कि तय मियाद में यह मिशन पूरा नहीं होने वाला।

 

– जब वॉटर रिसोर्स एंड गंगा रिजूवनेशन मंत्री नितिन गडकरी से नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि ज्यादातर काम 2019 में ही पूरे होंगे।

– गडकरी ने भास्कर से बातचीत में कहा कि गंगा नदी को साफ करना बहुत बड़ा काम है। 2019 तक गंगा की सफाई का ज्यादातर काम हो जाएगा। हालांकि, मंत्रीजी के बयान के उलट मंत्रालय ने जो खाका तय किया है उसमें यह काम 2021 तक जाता दिख रहा है।

यूपीए के समय के ही प्रोजेक्ट

– वहीं, पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि गंगा को लेकर सरकार सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है। यह सरकार यूपीए के समय के ही प्रोजेक्ट पूरे नहीं कर पाई है। नए के बारे में तो बात ही छोड़िए।

– गंगा सफाई का ब्लू प्रिंट तैयार करने वाली 7 आईआईटी को मिलाकर बनी कमेटी के प्रमुख प्रोफेसर विनोद तारे कहते हैं कि गंगा की सफाई का मतलब है ग्लेशियरों का संरक्षण, गंगा का साफ पानी, सहायक नदियों की सफाई, गंगा बेसिन के इलाके का भूजल स्वच्छ होना और जल की वापसी। यह काम संवेदनशीलता चाहता है।

गंगोत्री से गंगासागर तक का जायजा

– भास्कर ने गंगोत्री से गंगासागर तक गंगा की सफाई के काम का जायजा लिया। इस पड़ताल में सुप्रीम कोर्ट का अंदेशा सही हाेता लगा, जिसमें उसे तल्ख टिप्पणी करनी पड़ी थी कि – इस तरह से तो अनंत काल तक गंगा की सफाई का काम नहीं हो पाएगा।

– केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से 30 सितंबर 2017 तक के आंकड़ोंं पर नजर डालें तो गंगा और सहायक नदियोंं के लिए कुल 184 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं।

– इन प्रोजेक्ट के लिए 15832.95 करोड़ रुपए का बजट मंजूर हुआ है, लेकिन 30 सितंबर तक सिर्फ 46 प्रोजेक्ट ही पूरे हो पाए। पूरे होने वाले प्रोजेक्ट में से ज्यादातर मनमोहन सिंह सरकार के समय शुरू किए गए थे। वहीं, 72 प्रोजेक्ट पर अभी काम चल रहा है, 51 टेंडरिंग के लेवल पर हैं, जबकि 15 प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना है।

– इस तरह तीन साल में मंजूर हुए बजट में से सरकार गंगा पर सिर्फ 2825.66 करोड़ रुपए ही खर्च कर सकी है। अब तक मंजूर रकम का महज 17.84 फीसदी ही इस्तेमाल किया जा सका है।

प्रोग्राम्स की कोई कमी नहीं

– गंगा का पानी भले ही निर्मल न हो पाया हो, लेकिन मौजूदा सरकार में गंगा को लेकर हाई प्रोफाइल प्रोग्राम की कोई कमी नहीं रही।

– पहले जुलाई 2014 में गंगा मंथन कार्यक्रम हुआ। इसमें केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रियों की मौजूदगी में 500 एक्सपर्ट्स को जोड़ा गया।

– दूसरा बड़ा कार्यक्रम 2016 में हुआ जब जापान के पीएम शिंजो आबे ने मोदी के साथ बनारस के घाट पर भव्य गंगा आरती की।

– वहीं, दूसरी तरफ अब गंगा में वॉटर ट्रांसपोर्टेशन की शुरुआत हो चुकी है। बनारस से कोलकाता के बीच ढुलाई वाले जहाजों का ऑपरेशन इस साल शुरू हो गया।

गंगा क्यों साफ नहीं हो पा रही?

– गंगोत्री से गंगासागर तक यानी उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक 7 राज्यों में काम चल रहा है। इस काम में सबसे बड़े कंपोनेंट सीवेज इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 13330.62 करोड़ रुपए की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट का काम होना है। इसके लिए गंगा और सहायक नदियों पर 90 प्रोजेक्ट मंजूर हैं। इसमें 30 सितंबर तक सिर्फ 18 प्रोजेक्ट पूरे किए जा सके हैं। पूरे हुए प्रोजेक्ट में से 15 पुराने हैं।

– दूसरा प्रमुख हिस्सा घाट और श्मशान बनाने का है। इसके लिए कुल 61 प्रोजेक्ट के लिए 1368.41 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसमें से 24 पुरानी प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, जबकि एक भी नया प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है।

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