ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए करते हैं दूसरों की सेवा

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जीवन में सफल होने के लिए कभी भी कोई एक चीज़ सीमित नहीं होता। ठीक वैसे ही चरित्र को अच्छा बनाने के लिए भी अपने व्यक्तित्व में कई तरह के बदलाव करने पड़ते हैं। मगर कुछ ऐसे लोग होते हैं जो अपने स्वार्थ के लिए अपने चरित्र के अच्छे होने का ढोंग करते हैं। ऐसे लोग किसी का भला नहीं चाहते बल्कि जो भी कार्य करते हैं केवल अपने स्वार्थ के लिए करते हैं। तो आइए जानते हैंं आचार्य चाणक्य के श्लोक से कि अगर जीवन में ऐसे लोग हो तो क्या करना चाहिए।
चाणक्य नीति श्लोक-
सोपचार: कैतव:।
भावार्थ- धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए सेवा करते हैं
अर्थात- अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए धूर्त लोग दूसरों की चापलूसी करके उनकी सेवा में बने रहते हैं और उनकी कमजोर कड़ियोंकी तलाश करते रहते हैं, ताकि अवसर आने पर उन्हें तोड़ सकें। आचार्य चाणक्य ने इस सूत्र में ऐसे धूर्त और स्वार्थी लोगों से सदैव सतर्क रहने का परामर्श दिया है।
इसके अलावा इन लोगों से भी रहना चाहिए सावधान। आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस किसी का अपने जीवन में ऐसे लोगों ंसे पाला पड़ जाए तो जीवन बर्बादी की कगार तक पहुंच जाती है।
चाणक्य नीति श्लोक-
काम्यैर्वशेषैरुपचरणमुपचार:।
भावार्थ- चापलूसों से सावधान
अर्थात- धूर्त और चालाक व्यक्ति अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए प्राय: उपहार दिया करते हैं। राजा को ऐसे लोगों की मंशा को समझ लेना चाहिए और उनकी चापलूसी से सतर्क रहना चाहिए।
