ऑक्सीजन कंसंट्रेटर केस : दिल्ली पुलिस ने कहा- नवनीत कालरा ने व्हाइट कॉलर क्राइम किया,

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को  ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स की जमाखोरी और कालाबाजारी मामले में आरोपी कारोबारी नवनीत कालरा ने की जमानत याचिका का विरोध करते हुए एक अदालत को बताया कि कालरा ने 'व्हाइट कॉलर क्राइम' को अंजाम दिया और मृत्यु शैय्या पर लेटे मरीजों को अत्यधिक दामों पर मेडिकल उपकरण बेचकर मुनाफा कमाया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कालरा की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

हाल ही में एक छापे के दौरान कालरा के तीन रेस्टोरेंट्स – खान चाचा, टाउन हॉल तथा नेगे एंड जू से कोविड-19 मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले 524 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामद किए गए थे। कालरा मालिक तीन जून तक न्यायिक हिरासत में है।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स की कथित जमाखोरी करने और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचने के लिए 17 मई को गिरफ्तार किए गए कालरा की जमानत अर्जी पर सुनवाई की।

दिल्ली पुलिस की तरफ से पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि आरोपी की मंशा लोगों को ठगने और मुनाफा कमाने की थी। यह व्हाइट कॉलर क्राइम (समाज में ऊंची हैसियत व सम्मान रखने वाले शख्स द्वारा किया गया अपराध) है। उसने मृत्यु शैय्या पर पड़े जरूरतमंद लोगों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बेचे। श्रीवास्तव ने कालरा की जमानत याचिका खारिज करने का अनुरोध किया।

नवनीत कालरा ने कोर्ट से कहा- मेरा ठगने का इरादा नहीं था

दिल्ली पुलिस ने यह टिप्पणियां तब की है जब एक दिन पहले कालरा ने वरिष्ठ वकील विकास पहवा के जरिये अदालत को बताया कि उसकी लोगों को ठगने की आपराधिक मंशा नहीं थी और उसे मुकदमे की सुनवाई से पहले हिरासत में नहीं रखा जा सकता। शनिवार को सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत को कालरा के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर विवरण पुस्तिका दिखाई और कहा कि ये जर्मनी से नहीं लाए गए थे, जैसा कि आरोपी ने दावा किया है।

उन्होंने कहा कि इसका ऑक्सीजन का प्रवाह 35 प्रतिशत से कम का था और उसने 27,999 की एमआरपी के बजाय 70,000 रुपये से अधिक कीमत पर इसे बेचा। कालरा की इस दलील पर कि वह केवल जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहा था, इस पर सरकारी वकील ने कहा कि वह कोई चैरिटी नहीं कर रहा था। अगर वह लागत जितने दाम पर ही इन्हें बेचता तो यह परोपकार होता, लेकिन उसने मुनाफा कमाया।

श्रीवास्तव ने कहा कि डॉक्टरों की राय है कि ये ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कम क्षमता के कारण कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए उपयुक्त नहीं थे। उन्होंने कहा कि ये बेकार था और महज एक डिब्बा था। यहां तक कि हल्के और मध्यम लक्षण वाले मरीजों के लिए इनका इस्तेमाल करने से नुकसान पहुंच सकता था। इससे मौत होने की आशंका है।

उन्होंने अदालत को अपराध की गंभीरता के बारे में बताया और इस आधार पर जमानत रद्द करने का अनुरोध किया कि कारोबारी ने सबूतों से छेड़छाड़ की और उपकरण से सामग्री हटाई। पुलिस ने दावा किया कि ये कंसंट्रेटर चीन से आयात किए गए और इन्हें 16,000 से 22,000 रुपये प्रति कंसंट्रेटर की कीमत के बजाय 50,000 रुपये से 70,000 रुपये के अत्यधिक दाम पर बेचा गया।  

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