डेडलाइन से पहले नक्सलवाद को झटका, पापाराव ने डाले हथियार

बिलासपुर|नक्सलवाद की डेडलाइन से पहले बस्तर में आज सबसे बड़ा नक्सली सरेंडर हुआ. जहां नक्सल कमांडर पापाराव ने 18 नक्सलियों के साथ डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सामने जगदलपुर में सरेंडर कर दिया है|
नक्सली पापाराव ने डाले हथियार
डेडलाइन से पहले नक्सल कमांडर और बस्तर में दहशत के पर्याय रहे पापाराव ने 18 नक्सलियों के साथ गृहमंत्री विजय शर्मा के सामने सरेंडर कर दिया. बस्तर 5 दशक से ज्यादा समय तक हिंसा और बारूद के बीच पिसता रहा. 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने की गाइडलाइन से पहले ही छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का लगभग खात्मा हो चुका है. बस्तर में सुरक्षाबलों की बढ़ती मौजूदगी और साय सरकार की पुनर्वास से पुनर्जीवन योजना की वजह से नक्सली लगातार सरेंडर कर रहे हैं. पापाराव पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था|
अब संविधान के तहत अब लड़ाई लड़ी जाएगी – पापा राव
वहीं आत्मसमर्पण को लेकर पापा राव का बयान भी सामने आया. उन्होंने कहा कि बदलते हालात की वजह से फैसला लिया. पार्टी के भविष्य को बचाने के लिए सरेंडर किया. जान बचाने के लिए नहीं.. हथियारबंद संघर्ष से नुकसान बढ़ रहा है. अब संविधान के तहत अब लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि बस्तर की लड़ाई के लिए मुख्यधारा में लौटे हैं. सभी नक्सली अब मुख्यधारा में लौट आएं|
बचे नक्सली भी कर सकते हैं सरेंडर
वहीं पापाराव के बाद कोई भी बड़े कैडर का नक्सली अब छत्तीसगढ़ में नहीं बचा है. जानकारी है कि बस्तर में अब महज 40 के आसपास ही नक्सलियों के बचने की संभावना है… लेकिन ये सभी छोटे कैडर के हैं. इसके अलावा बचे हुए नक्सलियों के पास अब ना तो हथियार है और ना ही कोई इन्हें निर्देश देने वाला है. ऐसे में ये नक्सली भी अपनी जान बचाने के लिए गांवों में छिपे हुए हैं… और जल्द ही सरेंडर कर सकते हैं|
जवानों का सर्च अभियान रहेगा जारी
दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि 31 मार्च 2026 के बाद भी जरूरी सावधानी बरती जाएगी. इसका मतलब अगर समझा जाए, तो ये हो सकता है कि 31 मार्च के बाद भी बस्तर में सर्च अभियान के लिए जवान अंदरूनी इलाकों में जाते रहेंगे. ताकि नक्सलवाद पनपने का दोबारा कोई मौका ना मिले और सुरक्षा के साथ कोई समझौता ना किया जा सके|
