मध्य प्रदेश में नए FMD वायरस का अटैक! शहडोल में लंपी वायरस के बाद मवेशियों पर टूटा कहर

शहडोल : अभी कुछ दिनों पहले तक शहडोल में लंपी वायरस का कहर देखने को मिल रहा था, और अब इन दिनों मवेशियों के लिए नई बीमारी ने संकट खड़ा कर दिया है. इस अजीबोगरीब बीमारी में मुंह में छाले पड़ जाते हैं और बेजुबान मवेशियों को बुखार, पैर में फफोले और कीड़े पड़ने लगते हैं. इस बीमारी का नाम है FMD, जिसे स्थानीय भाषा में मुंहपका खुरपका रोग कहा जा रहा. इसकी वजह से मवेशियों को बहुत कष्ट होता है.

मुंहपका खुरपका रोग का खतरा

शहडोल पशुपालन विभाग के उपसंचालक अशोक कुमार सिंह बताते हैं, '' एफएमडी जिसे फूड एंड माउथ डिजीज (FMD) भी कहा जाता है, इसे मुंहपका खुरपका रोग भी कहा जाता है, ये वायरस से होता है, संक्रामक होता है और एक पशु से दूसरे पशु में फैल जाता है. जब पशु आपस में एक दूसरे के संपर्क में आते हैं, तब ये वायरस एक दूसरे में फैल जाता है, मुंहपका खुरपका रोग की बात करें तो अभी अपने जिले में स्थिति बहुत सामान्य है, बहुत ही रेयर एक दो परसेंट ही एफएमडी के केस मिल रहे हैं, उनका भी हम लोग स्क्रीनिंग करवाकर टीकाकरण करवा रहे हैं.''

 

साल में दो बार टीकाकरण का प्रावधान

पशुपालन विभाग के उपसंचालक बताते हैं, '' ये जो खुरपका मुंहपका रोग है, जिसे FMD भी बोलते हैं. इसका टीकाकरण हम लोग साल में दो बार करवाते हैं. 6 महीने के अंतराल में पूरे जिले में गाय भैंस हैं और जितने चार माह के ऊपर के पशु होते हैं, इन सभी का हम लोग टीकाकरण करवाते हैं.

इसके अलावा हम पशुपालकों को भी यही सलाह देते हैं कि सभी पशुओं का टीकाकरण करवाएं. कोई भी पशु छूटने न पाए. हमारे पास पर्याप्त मात्रा में FMD खुरपका मुंहपका बीमारी की वैक्सीन है, हमारा पूरा स्टाफ उसका टीकाकरण कर रहा है.''

 

मुंहपका खुरपका बीमारी के लक्षण

मुंहपका खुरपका बीमारी को लोकल भाषा में 'गोडहा' रोग भी कहा जाता है. इसमें सबसे पहले मुंह में छाले पड़ जाते हैं, जानवर को बुखार आता है, मुंह से लार आती है, वे खाना बंद कर देते हैं और कमजोर हो जाते हैं. शरीर में भी फफोले और कभी-कभी कीड़े भी पड़ जाते हैं. अपका पशु काफी परेशान होता है, लेकिन पशुपालकों को घबराना नहीं चाहिए, इसमें साधारण उपचार से पशु ठीक हो जाता है, मृत्यु दर बिल्कुल नहीं होती है, और पशु आसानी से ठीक हो जाता है.

 

जब भी पशु में इस रोग के लक्षण दिखाई दें तो दूसरे पशुओं से उसे अलग कर देना चाहिए, और गांव में भी जैसे पता चले कि इस गांव में एफएमडी की बीमारी है तो दूसरे गांव वालों को तत्काल टीकाकरण शुरू कर देना चाहिए.

 

इस बीमारी में हो सकता है ये नुकसान

पशुपालन विभाग के उपसंचालक कहते हैं, '' उदाहरण के तौर पर अगर गाय को एफएमडी खुरपका मुंहपका बीमारी हो जाती है, और वह दूध देती है, तो उसका दूध बिल्कुल कम हो जाता है. कभी-कभी गर्भवती गाय भैंस होती है तो उनका गर्भपात भी हो जाता है. आर्थिक नुकसान पशुपालकों को बहुत ज्यादा होता है, इसलिए भारत सरकार व मध्य प्रदेश सरकार साल में दो बार इसका टीकाकरण करवा रही है.''

Leave a Reply