सुकर्मा योग में भाद्रपद पूर्णिमा, किस समय होगा स्नान और दान?
इस साल की भाद्रपद पूर्णिमा 7 सितंबर दिन रविवार को है. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और उसके बाद दान करने का विधान है. भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान और दान करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. इस बार की भाद्रपद पूर्णिमा पर सुकर्मा योग बन रहा है. इस शुभ योग में स्नान और दान करना अत्यंत ही शुभ फलदायी होगा. आइए जानते हैं भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान और दान का शुभ मुहूर्त क्या है?
भाद्रपद पूर्णिमा तिथि मुहूर्त
पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस साल भाद्रपद पूर्णिमा की तिथि 7 सितंबर रविवार को 1:41 एएम से लेकर देर रात 11:38 पीएम तक है. सूर्योदय की तिथि के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान और दान करना 7 सितंबर को शास्त्र सम्मत है.
भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान-दान का मुहूर्त
हिंदू धर्म शास्त्रों में स्नान के दिन ब्रह्म मुहूर्त को सबसे उत्तम समय माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त स्थान के आधार पर अलग-अलग हो सकता है, हालांकि उसमें भी अधिक अंतर नहीं होना चाहिए. देश की राजधानी नई दिल्ली में भाद्रपद पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:16 ए एम तक है. इस समय में आपको भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए.
यदि आप ब्रह्म मुहूर्त में स्नान नहीं कर सकते हैं तो सूर्योदय के बाद कर लें. भाद्रपद पूर्णिमा पर सूर्योदय 06:02 बजे होगा. आप किसी पवित्र नदी में या फिर घर पर भी स्नान कर सकते हैं. घर पर नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर लें.
भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनें. उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. यह दान आप किसी ब्राह्मण, गरीब या जरूरतमंद को कर सकते हैं. भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान करने के बाद पितरों के लिए तर्पण करना न भूलें.
भाद्रपद पूर्णिमा पर क्या दान करें?
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद आपको चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान करना चाहिए. पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा से होता है. चंद्रमा मन का कारक है. पूर्णिमा और अमावस्या के दिन चंद्रमा की शक्तियां कम या ज्यादा होती हैं, जिसका लोगों के मन पर प्रभाव होता है. चंद्रमा को मजबूत करने या चंद्र दोष को दूर करने के लिए भाद्रपद पूर्णिमा चावल, चीनी, दूध, खीर, सफेद वस्त्र, चांदी आदि का दान कर सकते हैं.
दान देते समय क्या मंत्र पढ़ें
पूर्णिमा पर चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान करते समय आप ऊँ ऐं क्लीं सोमाय नम: या ऊँ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम: मंत्र का जाप कर सकते हैं.