नक्सल प्रभावित इलाकों में दहशत का दूसरा नाम बना C-60, 101 नक्सलियों को ढेर कर गृह मंत्री अमित शाह का सिर किया ऊँचा

नागपुर: अबूझमाड़ के घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन आसान नहीं है। जब इन जंगलों में सुरक्षा बल ऑपरेशन चलाते हैं तो उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि गोली किधर से आएगी? जिस जमीन पर वह चल रहे हैं, उसके नीचे लैंडमाइन तो नहीं है। गढ़चिरौली पुलिस के C-60 कमांडर वासुदेव मडावी ने ऐसे हालात से लड़कर पिछले 26 साल में 101 नक्सलियों को मार गिराया है। हालांकि अभी भी उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का खिताब नहीं मिला है। मडावी के बारे में कहा जाता है कि वह मिट्टी सूंघकर हालात का अंदाजा लगा लेते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी सी-60 कमांडो वासुदेव मडावी की उपलब्धि पर गर्व होगा। शाह ने 2026 तक लाल आतंक को खत्म करने का लक्ष्य रखा है।

26 साल में कई ऑपरेशन
48 साल के वासुदेव मडावी अपने 26 साल के करियर में कई ऑपरेशन में शामिल रहे। घने जंगलों में भूखे रहकर मिशन पूरा किया। उनकी बहादुरी और स्ट्रैटजी के कायल पूरा पुलिस विभाग हो गया। डिपार्टमेंट ने 1998 में कॉन्टेबल के तौर पर भर्ती हुए साहसी कॉन्स्टेबल को लगातार प्रमोशन दिया। वह अभी सब-इंस्पेक्टर पद पर तैनात हैं। उन्हें बहादुरी के लिए कई मेडल मिले हैं। गढ़चिरौली के एसपी नीलोत्पल ने बताया कि वासुदेव मडावी ने गढ़चिरौली के जंगलों में माओवादियों के खिलाफ लड़ाई में बड़ा अहम रोल निभाया है। वह ऑपरेशन के दौरान स्ट्रैटजी बनाने और उसे लागू करने में माहिर हैं। जरूरत पड़ने पर अपनी स्ट्रैटजी बदलते हैं, जो गेमचेंजर मूव बन जाता है।

101 पहुंच गया आंकड़ा
एसपी नीलोत्पल ने बताया कि मडावी ने कोपारशी में मुठभेड़ स्थल से चार शव बरामद किए, जिसके बाद उनका आंकड़ा 101 हो गया। मडावी हमेशा आगे बढ़कर नेतृत्व करते हैं। वह ऑपरेशन से पहले मिट्टी से बात करते हैं और बंदूक की लड़ाई शुरू करने से पहले जंगल के मूड को समझते हैं। वासुदेव मडावी कई एंटी नक्सल ऑपरेशन का हिस्सा रहे, जिसमें बोरिया कासनसुर एनकाउंटर शामिल है। इस ऑपरेशन में 40 माओवादी मारे गए थे। वह मर्दिनटोला, गोविंदगांव, कोपारशी-कोटूर और कटरांगट्टा के ऑपरेशन में भी शामिल हैं। उन्होंने पांच माओवादियों को गिरफ्तार भी किया।

बहादुरी को मिले गैलेंट्री मेडल
मडावी को उनकी बहादुरी के लिए दो गैलेंट्री मेडल मिले हैं। 10 नवंबर 1976 को जन्मे मडावी 22 साल की उम्र में गढ़चिरौली पुलिस में शामिल हुए थे। वे जल्द ही स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गए। 48 साल की उम्र में भी वह आगे बढ़कर ऑपरेशन का नेतृत्व करते हैं। C-60 कमांडो दस्ते का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता के कारण उनके साथी भी सम्मान करते हैं।

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