CAG की रिपोर्ट: सेनाओं को मिले खराब क्वालिटी के पैराशूट, शिकायत के बाद भी सुधार नहीं

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने देश में बन रहे रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। कानपुर स्थित आयुध पैराशूट फैक्टरी (ओपीएफ) ने जल, थल और नभ सेना के लिए खराब गुणवत्ता के पैराशूट बनाए। खराब गुणवत्ता के पैराशूटों के कारण सेनाओं की तैयारियां प्रभावित हुईं। सेनाओं की तरफ से शिकायत के बावजूद आयुध फैक्टरी पैराशूट की कमियों को दूर नहीं कर पाई।


कैग की मंगलवार को संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि कई किस्म के पैराशूट की जरूरत सेनाओं को होती है। कुछ पैराशूट देश में बनते हैं लेकिन जो नहीं बन पाते, उन्हें विदेशों से खरीदा जाता है। देश में पैराशूट बनाने का जिम्मा ओपीएफ कानपुर के पास है। लेकिन फैक्टरी द्वारा बनाए गए पैराशूटों की गुणवत्ता में कई खामियां पाई गईं। सेनाओं की तरफ से चिंता जताई गई कि इन पैराशूट से मानवों को उतारना खतरनाक साबित हो सकता है।


सीएजी ने रिपोर्ट में कहा है कि 2014 से 2017 के बीच ओपीएफ द्वारा आपूर्ति किए गए 730 पैराशूट की गुणवत्ता खराब पाई गई। इनकी कीमत करीब 11 करोड़ रुपये के करीब थी। इनके चलते इन्हें उपयोग के योग्य नहीं माना गया। जैसे बीपीएसयू-30 पैराशूट में दोनों कैनोपी पर व्हिपिंग ढीली हो गई और पुली के सिरे पर चढ़ गई। जबकि पीपी चेस्ट टाइप पैराशूट के सहायक पैराशूट में छेद पाया गया। पीपी मिराज 2000 पैराशूट में हारनेस असेंबली का लैप स्ट्रैप समायोजन के लिए बहुत कड़ा था। छोटे कद, छोटी लंबाई इत्यादि से यह असुविधा हो रही थी। 


कैग ने कहा है कि ओपीएस 2012-17 के दौरान सिर्फ पांच मौकों पर ही पैराशूट के उत्पादन लक्ष्य को हासिल कर पाई जबकि 19 मौकों पर देरी की गई। दूसरे, पैराशूटों में गुणवत्ता की खामियों की वजह से तीनों सेनाओं की संचालन तैयारियों तथा उड़ान प्रतिबद्धताओं को प्रभावित किया। निरीक्षण के दौरान पैराशूट में इस्तेमाल किए गए कपड़ों में भी दोष पाए गए। कई जगह कपड़ों में छेद पाए गए जो पैराशूट की उड़ान के लिए घातक होता है। कैग ने यह भी कहा कि नए विकसित सीएफएफ एवं एचडी पैराशूटों का थोक उत्पादन गुणवत्ता मानकों का समाधान नहीं हो पाने के कारण शुरू नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि नौ से 11 साल के इंतजार के बाद भी सेनाओं को ये पैराशूट नहीं मिल पाए। कैग ने इस बात पर भी नाराजगी प्रकट की है कि ओएफबी ने इस मुद्दे पर मंत्रालय के प्रश्नों का जवाब नहीं दिया। 

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