पैर में छाले कभी मेरी राह नहीं रोक पाए, पूर्व CM वसुंधरा राजे को याद आया सांसद काल
झालावाड़ जिले के उन्हेल कस्बे में गुरुवार को राजनीति और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। मंच पर थीं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सामने जनसैलाब। मौका था सांसद दुष्यंत सिंह की आशीर्वाद यात्रा के शुभारंभ का। भाषण की शुरुआत में ही वसुंधरा राजे ने अपने संघर्षों की ऐसी तस्वीर खींची कि पूरा माहौल तालियों और भावुकता से भर उठा।राजे ने शेराना अंदाज में कहा— “मैं चलती रही उम्रभर दुआओं के साथ, पांव के छाले कभी मेरी राहें नहीं रोक पाए।” इसके बाद उन्होंने अपने सांसद काल के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे पदयात्राओं के दौरान पैरों में छाले पड़ जाते थे। “छाले पड़ते थे तो पिन से फोड़कर आगे बढ़ जाती थी, क्योंकि रुकना मेरे स्वभाव में नहीं है,” यह कहते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि राजनीति उनके लिए सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम रही है।
आशीर्वाद यात्रा नहीं, भरोसे की यात्रा
पूर्व मुख्यमंत्री ने सांसद दुष्यंत सिंह की आशीर्वाद यात्रा को केवल राजनीतिक कार्यक्रम मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा इस क्षेत्र की उन्नति, विकास और जनता के विश्वास की यात्रा है। “यह पदयात्रा वोट मांगने नहीं, रिश्ते निभाने की यात्रा है,” राजे ने कहा।उन्होंने मौजूदा राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि ज्यादातर नेता चुनाव के समय आते हैं, जीतकर चले जाते हैं और पूरे पांच साल एसी कमरों में रहते हैं। “हम ऐसा नहीं करते। हम इस क्षेत्र को परिवार मानते हैं। यहां के लोगों को मतदाता नहीं, भाग्य निर्माता मानते हैं,” राजे के इस बयान पर जनसभा में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं।
‘आपकी तकलीफ को गले लगाने आए हैं’
अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने सांसद दुष्यंत सिंह की कार्यशैली की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सांसद हमेशा जनता के बीच रहते हैं और हर व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। “यह यात्रा राजनीतिक नहीं, अपनों की यात्रा है। अपनों के लिए, अपनों की ओर से,” उन्होंने कहा।राजे ने आगे कहा कि यह यात्रा लोगों से जुड़ने, उनकी आवाज सुनने और उनके सपनों को पूरा करने की कोशिश है। “इस यात्रा का लक्ष्य है कि हर नागरिक का सम्मान हो, हर व्यक्ति का उत्थान हो और हर वाजिब समस्या का समाधान निकले,” उन्होंने कहा।भावनात्मक अंदाज में उन्होंने जोड़ा— “यह यात्रा आपके खेतों की मिट्टी, आपके बच्चों की मुस्कान और आपकी मेहनत को अपनाने की यात्रा है। सांसद आपकी तकलीफ को गले लगाने आए हैं।” उनके इस कथन ने सभा में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
नागेश्वर से निकली तीन दिवसीय यात्रा
प्रसिद्ध धार्मिक स्थल उन्हेल नागेश्वर से सांसद दुष्यंत सिंह ने तीन दिवसीय आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत की। धार्मिक आस्था और जनसंपर्क का यह संगम क्षेत्र में खास चर्चा का विषय बन गया है। यात्रा के शुभारंभ के मौके पर सांसद ने कहा कि क्षेत्र का विकास और जनहित उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।दुष्यंत सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा। “जनता का आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है और उसी के सहारे क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम करता रहूंगा,” उन्होंने कहा।
भरोसे और जुड़ाव की राजनीति
उन्हेल की यह जनसभा केवल भाषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक संदेश भी साफ दिखाई दिया—राजनीति अगर जमीन से जुड़ी हो, तो भरोसा अपने आप बनता है। वसुंधरा राजे के संघर्ष भरे किस्से और दुष्यंत सिंह की आशीर्वाद यात्रा ने यह संकेत दिया कि झालावाड़ में राजनीति का रास्ता अभी भी पदयात्रा, संवाद और संवेदना से होकर गुजरता है।आशीर्वाद यात्रा के साथ यह साफ हो गया कि आने वाले दिनों में यह क्षेत्र फिर एक बार राजनीतिक हलचलों का केंद्र बनने जा रहा है—जहां छालों का दर्द भी जनसेवा के जुनून के आगे छोटा पड़ जाता है
