लाड़ली बहनें और मध्य प्रदेश सरकार दोनों होंगे अमीर, मोहन यादव सरकार का मास्टर प्लान

भोपाल: दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन अब दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रदेश की सवा करोड़ लाड़ली बहनों को भी एक नई योजना से जोड़ने की तैयारी की जा रही है. इस नई योजना के तहत प्रदेश की लाड़ली बहनों को गौपालन से जोड़ा जाएगा. इसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा योजना तैयार की जा रही है. इस योजना के तहत लाड़ली बहनों को एक-एक गाय देने पर विचार किया जा रहा है. आगामी बजट में इस नई योजना का ऐलान किया जा सकता है.

इस तरह मिलेगा लाड़ली बहनों को लाभ

मध्य प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. मध्य प्रदेश में 591 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध का उत्पादन किया जा रहा है. इसे 20 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर सरकार काम कर रही है. इस दिशा में अब मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की लाड़ली बहनों को भी दुग्ध उत्पादन की इस मुहिम से जोड़ने जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार प्रदेश की लाड़ली बहनों को जल्द ही एक-एक गाय देने की तैयारी कर रही है.

 

इसके लिए लाड़ली बहना गौपालन योजना पर काम किया जा रहा है. पशुपालन विभाग द्वारा इस योजना का खाका तैयार किया जा रहा है. इस योजना के तहत लाड़ली बहनों को अनुदान पर एक-एक दुधारू गाय उपलब्ध कराई जाएगी.

ऐसे मिलेगा लाभ

इस योजना के तहत लाड़ली बहनों को अनुदान पर दुधारू गाय उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें महिलाओं को एक-एक गाय अनुदान पर उपलब्ध कराई जाएगी.
कितना मिलेगा अनुदान

इस योजना में महिलाओं को एक गाय खरीदने के लिए करीबन 1 लाख रुपए तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें राज्य शासन द्वारा 33 फीसदी तक का अनुदान दिया जाएगा. इसमें सामान्य और ओबीसी वर्ग की महिलाओं को 25 फीसदी का अनुदान दिया जाएगा. जबकि एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को 33 फीसदी तक का अनुदान दिया जाएगा.

 

ऐसे चुकाना होगी राशि

गाय लेने वाले महिलाओं को बाकी राशि हर माह समान किस्त के रूप में चुकाना होगी. यह राशि महिलाओं को सरकार अपनी गारंटी पर बैंकों से दिलाएगी.

इसलिए शुरू की जा रही योजना

राज्य शासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग द्वारा योजना पर काम किया जा रहा है. इस योजना को शुरू किए जाने का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है. गौपालन से जोड़ने से ग्रामीण अंचल की महिलाएं दूध बेचकर आर्थिक रूप से सक्षम होंगी. साथ ही प्रदेश में इसका असर दुग्ध उत्पादन में बढ़ोत्तरी के रूप में दिखाई देगा. लाड़ली बहनों के खातों में हर माह सरकार 1500 रुपए की राशि डाल रही है.

 

इस वजह से गाय खरीदी पर बैंक की किस्तों में भी महिलाओं को परेशानी नहीं आएगी. पशुपालन विभाग के संचालक डॉ. पीएस पटेल कहते हैं कि "इस योजना पर काम चल रहा है, इस पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा."

आगामी बजट में यह योजना हो सकती है शामिल

आगामी बजट में दुग्ध उत्पादन से महिलाओं को जोड़ने की इस योजना को लेकर ऐलान किया जा सकता है. राज्य सरकार मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत हर माह 1500 रुपए की राशि उनके खातों में डाल रही है. जून 2023 से शुरू हुई इस योजना के तहत राज्य सरकार अब तक महिलाओं के खातों में 50 हजार करोड़ की राशि डाल चुकी है. हर साल मध्य प्रदेश सरकार करीब 23 हजार करोड़ इस योजना पर खर्च कर रही है.

राज्य सरकार की मंशा है कि इस राशि के अलावा प्रदेश की महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम बनें. राज्य सरकार इसके लिए महिलाओं को ट्रेनिंग और जॉब से जोड़ रही हैं. रोजगारपरक उद्योग में काम करने वाली महिलाओं को 5 हजार रुपए की मदद भी सरकार कर रही है.

 

लाड़ली बहना योजना में कितनी महिलाओं को मिल रहा लाभ

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में नए साल में लाड़ली बहनों की संख्या 1 लाख कम हो गई है. दिसंबर 2025 में लाड़ली बहनों की संख्या 1.26 करोड़ से ज्यादा थी, जो जनवरी 2026 में घटकर 1.25 करोड़ हो गई है. 32वीं किस्त के रूप में 1 करोड़ 25 लाख महिला हितग्राहियों को 1857 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई है. 2023 में जब योजना शुरू हुई थी, तब इस योजना में पात्र हितग्राहियों की संख्या 1 करोड़ 32 लाख थी. इस तरह दो साल में 7 लाख महिला हितग्राही की संख्या कम हुई है. इस योजना में हितग्राही की अधिकतम उम्र 60 साल है.

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने चल रही यह योजनाएं

मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य शासन द्वारा तीन अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं. इसमें एक नई योजना डॉ. भीमराव दुग्ध उत्पादन योजना अप्रैल 2025 में शुरू की गई थी. इसके अलावा 2016-17 से आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना और डेयरी प्लस योजना संचालित की जा रही है.

क्या है डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना

इस योजना के तहत हितग्राही को डेयरी खोलने के लिए 42 लाख रुपए तक की मदद दी जा रही है. यह मदद डेयरी खोलने के लिए शेड बनाने और पशु खरीदने के लिए दी जा रही है. अप्रैल 2025 से शुरू हुई इस योजना में दो अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई हैं. गाय की डेयरी खोलने पर 36 लाख रुपए तक का बैंक के माध्यम से लोन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि भैंस की डेयरी खोलने पर 42 लाख तक का लोन उपलब्ध कराया जा रहा है.

 

इस योजना में सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए 75 फीसदी बैंक लोन और 25 फीसदी की सब्सिडी, जबकि एससी-एसटी वर्ग के लिए 33 फीसदी की सब्सिडी और 67 फीसदी बैंक लोन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.

 

क्या है आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना

आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना के तहत राज्य सरकार हितग्राही इस योजना के तहत कम से कम 5 या इससे अधिक पशु की योजना स्वीकृत करने का विकल्प देती है. इस योजना में राज्य सरकार द्वारा 10 लाख रुपए तक का लोन स्वीकृत किया जाता है. इस योजना में 75 फीसदी तक का लोन बैंक के जरिए प्राप्त किया जाता है, बाकी 25 फीसदी राशि किसान हितग्राही को अंशदान के रूप में देनी होती है. इस योजना में सामान्य वर्ग को 25 फीसदी और एससी-एसटी वर्ग के हितग्राही को 33 फीसदी और अधिकतम 2 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई जाती है.

क्या है डेयरी प्लस योजना

सितंबर 2022 से शुरू हुई डेयरी प्लस योजना में भी हितग्राही को दो मुर्रा नस्ल की भैंस दी जाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए दो मुर्रा भैंसे खरीदने के लिए हितग्राही को आवेदन के साथ 1.47 हजार रुपए जमा करने होंगे. जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 73 हजार 700 रुपए जमा करने होंगे. बाकी राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी. यानी सरकार इस योजना में सामान्य वर्ग के हितग्राही को 50 फीसदी और एससी-एसटी वर्ग को 75 फीसदी की छूट देती है.

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