20 या 21 मार्च… भारत में कब मनाई जाएगी ईद, इस्लाम में हरे रंग को क्यों माना जाता है पाक

ईद उल-फितर को मीठी ईद भी कहते हैं और यह पर्व मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. एक महीने रोजा रखने के बाद ईद के दिन अल्लाह को शुक्रिया किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर इस्लाम में हरे रंग को सबसे पाक क्यों माना जाता है. आइए जानते हैं भारत में ईद कब मनाई जाएगी और इस्लाम में हरे रंग का क्या महत्व है…
मुस्लिम समुदाय का पवित्र माह रमजान चल रहा है और यह इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना होता है. रमजान के बाद ईद उल-फितर का पर्व मनाया जाता है, जिसे मीठी ईद भी कहते हैं. रमजान के दौरान मुसलमान रोजा रखते हैं, इबादत करते हैं और आत्मसंयम का पालन करते हैं, वहीं ईद में नमाज अदा करते हैं, एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारक कहते हैं और घरों में मीठे पकवान जैसे सेवइयां और विभिन्न व्यंजन बनाए जाते हैं. लेकिन इस बार एक सवाल सभी के मन में आ रहा है कि आखिर ईद का पर्व कब मनाया जाएगा. सभी अपने अपने हिसाब से आकलन कर रहे हैं, कुछ 20 मार्च को बता रहे हैं तो कुछ 21 मार्च को ईद का पर्व मना रहे हैं.
ईद का पर्व चांद के दिखने पर निर्भर होता है. अगर ईद का चांद 19 तारीख को दिख गया तो ईद का पर्व 20 मार्च को मनाया जाएगा. अगर चांद 20 मार्च को दिखा तो 21 मार्च को भारत में ईद मनाई जाएगी. ईद-उल-फितर इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के अनुसार शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाई जाती है. चूंकि इस्लामिक कैलेंडर चांद के दिखने पर आधारित होता है, इसलिए ईद की तारीख हर साल बदलती रहती है. भारत समेत कई देशों में चांद दिखने के बाद ही ईद का ऐलान किया जाता है. इस्लामिक कैलेंडर का नौंवा महीना रमजान का तो दसवां महीना शव्वाल का होता है. शव्वाल माह के पहले दिन ही ईद उल फितर का पर्व मनाया जाता है
ईद उल-फितर के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह नमाज अदा करते हैं, जिसे ईद की नमाज कहा जाता है. लोग एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद देते हैं और ईद मुबारक कहते हैं. घरों में सेवइयां और अन्य मिठाइयां बनाई जाती हैं, जो इस त्योहार की खास पहचान हैं. ईद-उल-फितर का एक महत्वपूर्ण पहलू जकात-उल-फितर (फितरा) भी है, जिसमें जरूरतमंदों को दान दिया जाता है ताकि वे भी त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकें. यह सामाजिक समानता और भाईचारे का संदेश देता है.
पवित्र कुरान के मुताबित, रमजान के पाक माह में भूख-प्यास बर्दाश्त करने के बाद अल्लाह एक दिन अपने बंदों को बख्शीश देता है. बख्शीश के इस दिन को ईद-उल-फितर कहा जाता है. ईद-उल-फितर के दिन मुसलमान खुदा का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने पूरे माह उपवास रखने की ताकत दी. ईद पर एक खास रकम (जकात) गरीबों व जरूरतमंद के लिए निकाल दी जाती है और ईद के दिन नमाज अदा करने के बाद परिवार में सभी को फितरा दिया जाता है, जिसमें 2 KG ऐसी चीजें दी जाती हैं, जो हर दिन खाने की हों.
जिस तरह हिंदुओं में केसरिया रंग का महत्व है, उसी तरह इस्लाम में हरे रंग को पाक माना जाता है. दरगाह की चादर से लेकर झंडे तक सब कुछ हरे रंग का होता है. यही कारण है कि दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के मज़हबी झंडों, मस्जिदों और सांस्कृतिक प्रतीकों में हरे रंग का व्यापक इस्तेमाल देखने को मिलता है. इस्लामिक परंपराओं के मुताबिक, हरा रंग जन्नत की हरियाली और खुशहाली को दर्शाता है. पैगंबर मुहम्मद से जुड़ी कई रिवायतों (हदीस) में हरे रंग के लिबास और परदों का उल्लेख मिलता है. माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद को हरा रंग पसंद था और मुहम्मद साहब हरे रंग के लिबास पहना करते थे, जिससे इस रंग को विशेष मज़हबी महत्व मिला. इसके अलावा कुरआन में भी जन्नत के निवासियों के हरे रेशमी लिबास पहनने का जिक्र मिलता है, जो इस रंग को और अधिक पाक बनाता है.
इतिहास में भी हरे रंग का महत्व रहा है. इस्लामी खलीफाओं और विभिन्न मुस्लिम शासकों ने अपने झंडों में हरे रंग को अपनाया, जिससे यह इस्लाम की पहचान का हिस्सा बन गया. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस्लाम में किसी रंग को अनिवार्य रूप से पवित्र मानने का कोई सख्त नियम नहीं है, लेकिन कल्चर और मज़हबी परंपराओं ने हरे रंग को विशेष स्थान दिया है. हरे रंग को इस्लाम में पाक यानी पवित्रता, शांति और जन्नत का प्रतीक माना जाता है.
