Rahul Gandhi का केंद्र पर हमला, चीनी CCTV और AI प्लेटफॉर्म पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि भले ही सरकार ने आम लोगों के लिए चीनी CCTV कैमरों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, लेकिन सरकारी इमारतों के अंदर अभी भी ऐसे कैमरे लगे हुए हैं। राहुल गांधी ने इस बात पर चिंता जताई कि विदेशी AI प्लेटफॉर्म संवेदनशील डेटा को प्रोसेस कर रहे हैं और सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप है। उन्होंने इस चुप्पी को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

IT मंत्रालय के जवाबों से असंतुष्ट राहुल गांधी

राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय से कई अहम सवाल पूछे थे। उनके सवालों का जो जवाब आया, उसमें बहुत कुछ कहा गया, लेकिन जो असल में पूछा गया था, उसका कोई सीधा या स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने सरकार के इस रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है और इसे पारदर्शिता की कमी करार दिया है। राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें जो जवाब मिले, वे पूरी तरह से गोलमोल थे और किसी भी ठोस जानकारी से रहित थे।

राहुल गांधी ने मंत्रालय से विशिष्ट जानकारी मांगी थी। उन्होंने पूछा था कि सरकारी इमारतों में लगे कैमरे किन देशों से आए हैं? उनमें से कितने कैमरे सुरक्षा की दृष्टि से प्रमाणित किए गए हैं? कौन से विदेशी AI प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा को प्रोसेस कर रहे हैं, और उनके नाम क्या हैं? इसके अलावा, उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि कौन से प्रतिबंधित ऐप्स, जो पहले सुरक्षा कारणों से बैन किए गए थे, अब अलग-अलग नामों के साथ अभी भी चल रहे हैं। ये सभी सवाल सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जुड़े थे। मंत्रालय के जवाब पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय के पत्र में न तो कोई संख्या बताई गई, न ही किसी प्लेटफार्म का नाम। उन्होंने इस स्थिति को अस्वीकार्य बताया, खासकर जब देश की संवेदनशील जानकारी और डेटा की सुरक्षा का मुद्दा दांव पर हो। उनका कहना था कि सरकार इस महत्वपूर्ण विषय पर जानबूझकर अंधेरा बनाए हुए है।

राहुल गांधी का आरोप, बोले- देश को अंधेरे में रखा जा रहा है

राहुल गांधी ने सरकार के जवाब का पत्र अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया और एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि पांच साल पहले यह स्वीकार किया गया था कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे लगभग दस लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर का जोखिम पैदा करते हैं। लेकिन, आज भी सरकार यह बताने को तैयार नहीं है कि जो कैमरे हम पर नजर रख रहे हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं। यह जानकारी छुपाना सीधे तौर पर भारत को अंधेरे में रखने की एक सोची-समझी साजिश है, जैसा कि राहुल गांधी ने कहा।

उन्होंने अपने आरोपों को और धार देते हुए कहा कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है और विदेशी निगरानी की सच्चाई को छिपाकर हर नागरिक की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है। यह बयान सरकार की डेटा सुरक्षा नीतियों पर गंभीर सवाल उठाता है और पारदर्शिता की मांग को मजबूती से सामने रखता है। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को यह जानने का पूरा हक है कि उनकी गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है या नहीं।

दिल्ली में सड़कों से हट रहे चीनी CCTV, सरकारी इमारतों पर सवाल

यह मामला उस समय सामने आया है जब दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों से चीनी CCTV कैमरों को हटाने का काम चल रहा है। दिल्ली के CCTV सर्विलांस नेटवर्क का आधे से ज़्यादा हिस्सा चीन में बने कैमरों का है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं लगातार बढ़ रही थीं। दिल्ली सरकार ने इन चिंताओं को देखते हुए इन कैमरों को चरणबद्ध तरीके से बदलने का काम शुरू कर दिया है। यह कदम एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जहां सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश वर्मा ने बुधवार को घोषणा की कि चीनी कंपनी Hikvision से लिए गए कैमरों को पूरे शहर से धीरे-धीरे हटाया जाएगा। इन कैमरों की जगह दूसरे देशों में बने, सुरक्षित और प्रमाणित कैमरे लगाए जाएंगे। दिल्ली सरकार का यह फैसला सार्वजनिक सुरक्षा और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है।

दिल्ली में PWD ने कुल 2.7 लाख से ज़्यादा CCTV कैमरे लगाए हैं। इनमें से पहले चरण के दौरान, जो सितंबर 2020 से नवंबर 2022 तक चला था, लगभग 1.4 लाख कैमरे चीन में बने थे। यह एक बड़ी संख्या है, जो सुरक्षा जोखिम को बढ़ा सकती थी। हालांकि, दूसरे चरण में, जो जून 2025 से मार्च 2026 तक चलने वाला है, बाकी बचे हुए कैमरे चीन के अलावा दूसरे देशों से लिए जाएंगे। यह योजना भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए तैयार की गई है।

इन सबके बीच, राहुल गांधी का मुख्य सवाल सरकारी इमारतों के अंदर चीनी कैमरों को लेकर है। दिल्ली की सड़कों से चीनी कैमरे हटाए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी इमारतों के भीतर लगे इन कैमरों को लेकर सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट बयान नहीं दिया है। इसी मुद्दे पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब आम लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, तो देश के संवेदनशील सरकारी डेटा की सुरक्षा को लेकर ऐसी ढिलाई क्यों बरती जा रही है। यह स्थिति सरकार की डेटा सुरक्षा नीति में एक बड़े विरोधाभास को उजागर करती है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा, “पांच साल पहले यह मानने के बाद कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 10 लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर के जोखिम पैदा करते हैं, आज भी सरकार ने ये नहीं बताया कि आज जो कैमरे हम पर नजर रख रहे हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं। यह जानबूझकर भारत को अंधेरे में रखने की साजिश है। मोदी सरकार अपनी नाकामी पर पर्दा डाल विदेशी निगरानी की सच्चाई छिपा कर हर नागरिक की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।” उनके ये आरोप सरकार पर गंभीर दबाव बनाते हैं कि वह डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता पर अधिक ध्यान दे।

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