ठाकरे गुट में टूट की अटकलें तेज, शिंदे के बयान से सियासत गरमाई

महाराष्ट्र। सियासी पारा तब हाई हो गया, जब खबरें आईं कि 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत एकनाथ शिंदे ने बड़ा कदम उठाया है और उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 8 सांसदों ने एकनाथ शिंदे से मुलाकात की है. अटकलें लगने लगीं कि महाराष्ट्र में उद्धव गुट पर बड़ा संकट आने वाला है. हालांकि, खुद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बड़ा बयान देकर इन अटकलों पर विराम लगा दिया। एकनाथ शिंदे ने कहा, "उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के साथ हुई कथित बैठक की खबरें पूरी तरह निराधा हैं. ऐसी खबरें दुर्भावनापूर्ण और भ्रम पैदा करने वाली हैं." एकनाथ शिंदे का दावा है कि ऐसी कोई बैठक हुई ही नहीं है।
'डेढ़ साल से चल रहीं ऐसी अफवाहें'
इतना ही नहीं, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के सांसद टूटकर शिवसेना में शामिल होने वाले हैं, ऐसी अफवाहें बीते एक-डेढ़ साल से फैलाई जा रही हैं. इनमें किसी प्रकार की सच्चाई नहीं है. ये महज अफवाहें हैं. एकनाथ शिंदे ने सलाह दी है कि सनसनी फैलाने के लिए इस तरह की खबरें देना मीडिया को टालना चाहिए।
उद्धव गुट में बड़ी टूट की थीं अटकलें
दरअसल, सुबह से ये खबरें चल रही थीं कि एकनाथ शिंदे ने ठाणे में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के साथ एक गुप्त बैठक की थी. यह भी चर्चा थी कि उद्धव गुट का एक धड़ा टूटकर शिंदे गुट में शामिल हो सकता है. जानकारी के लिए बता दें कि उद्धव ठाकरे गुट के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें लोकसभा के 9 और राज्यसभा के एक सदस्य शामिल हैं. साल 2022 में एकनाथ शिंदे ने बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के भीतर बगावत की अगुवाई की और विधायकों के एक समूह के साथ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व से अलग हो गए. इसके बाद उन्हें पार्टी का नाम और उसका चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ भी मिल गया. जहां शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की सहयोगी है, वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी का हिस्सा है।
