प्राथमिक स्तर से ही शुरू हो रहा कोचिंग का चलन, हाई सेकेंडरी तक 59% छात्र

दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में स्कूल शिक्षा पर भरोसा कम और कोचिंग पर निर्भरता कहीं ज्यादा है। राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण (NSS) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में करीब 39.1% छात्र निजी कोचिंग ले रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 27% है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं क्योंकि यहां के परिवार बच्चों की कोचिंग पर देश के औसत से दोगुना खर्च कर रहे हैं।

दिल्ली में कोचिंग का बढ़ता ट्रेंड

प्राथमिक स्तर: दिल्ली के 30.2% छात्र कोचिंग लेते हैं (राष्ट्रीय औसत 22.9%) ,  माध्यमिक स्तर: 51.6% छात्र कोचिंग पर निर्भर (राष्ट्रीय औसत 37.8%)

उच्चतर माध्यमिक स्तर: 59.2% छात्र कोचिंग लेते हैं (राष्ट्रीय औसत 37.9%) , दिल्ली इस मामले में देशभर में छठे स्थान पर है, जबकि सबसे आगे त्रिपुरा (78.6%) है।

लड़कियां कोचिंग में आगे

दिल्ली में लड़कियां लड़कों से ज्यादा कोचिंग ले रही हैं। प्राथमिक स्तर पर 34.8% लड़कियां बनाम 27.3% लड़के उच्चतर माध्यमिक स्तर पर 61.8% लड़कियां बनाम 60.3% लड़के , शहरी-ग्रामीण अंतर भी साफ , शहरी दिल्ली: उच्चतर माध्यमिक में 61% छात्र कोचिंग लेते हैं ग्रामीण दिल्ली: सिर्फ 31.4% छात्र जेब पर भारी पड़ रही कोचिंग 

दिल्ली के परिवार कोचिंग पर राष्ट्रीय औसत से दोगुना खर्च कर रहे हैं।

प्राथमिक स्तर: दिल्ली ₹2,195, राष्ट्रीय औसत ₹1,313, माध्यमिक स्तर: दिल्ली ₹10,866, राष्ट्रीय औसत ₹4,183 , उच्चतर माध्यमिक स्तर: दिल्ली ₹12,891, राष्ट्रीय औसत ₹6,384  कुल मिलाकर, दिल्ली के परिवार एक छात्र पर औसतन ₹5,643 सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि देश का औसत सिर्फ ₹2,409 है।

नतीजा

रिपोर्ट साफ दिखाती है कि दिल्ली में बच्चे स्कूल की पढ़ाई पर निर्भर नहीं हैं और कोचिंग अब पढ़ाई का मुख्य हिस्सा बन चुकी है।

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