1 अप्रैल से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर नहीं होगा नकद लेनदेन!

नई दिल्ली। नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए सरकार 1 अप्रैल से नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन को पूरी तरह से खत्म करने जा रही है। सरकार हाईवे पर टोल टैक्स वसूलने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में टोल प्लाजा पर पेमेंट के लिए फास्टैग और यूपीआई जैसे डिजिटल मोड पर निर्भर रहना पड़े। वर्तमान में नियमों के मुताबिक अगर आपकी गाड़ी के पास वैलिड फास्टैग नहीं है या काम नहीं कर रहा है, तो रेगुलर टोल का दोगुना चार्ज वसूला जाता है। वहीं, जो लोग यूपीआई से पेमेंट करना चुनते हैं, उनसे उनकी गाड़ी की कैटेगरी के हिसाब से टोल टैक्स का 1.25 गुना भुगतान करना होता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि यूपीआई से पेमेंट नवंबर में कैश पेमेंट को कम करने के एक विकल्प के तौर पर शुरू किया गया था, जो तब टोटल टोल कलेक्शन का करीब 2 फीसदी था। अब तक कैश पेमेंट में करीब 1 फीसदी की गिरावट आई है, जो कुछ महीने पहले कैश में जमा होने वाले पेमेंट का आधा है। सभी टोल प्लाजा पर पेमेंट करने के लिए यूपीआई सिस्टम है। एक रिपोर्ट के हवाले से यह पता चला है कि सरकार ओवरलोडिंग के लिए पेनल्टी के मुद्दे को सुलझाने पर भी काम कर रही है, जो अभी ज्यादातर कैश में दिए जाते हैं। कैशलेस ओवरलोडिंग पेनल्टी पेमेंट को सही और आसान बनाने के लिए एक प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
एनएचएआई ने कहा कि प्रस्तावित उपाय का मकसद इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन में मिले फायदों को मजबूत करना और फीस प्लाजा ऑपरेशन की एफिशिएंसी और भरोसे को मजबूत करना है।
सरकार के इस नियम का मकसद हाईवे पर जाम और लंबी कतारों से यूजर्स को निजात दिलाना है। कई बार कैश पेमेंट में वक्त ज्यादा लग जाता है क्योंकि पैसे के लेनदेन, छुट्टा देने या लेने में, रसीद काटने में काफी समय लगता है। ऐसे में टोल पर गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाती है। डिजिटल पेमेंट होने से गाड़िया बिना रूके हाईवे से गुजर सकेंगी। इससे एक तरफ यूजर्स के लिए भी हाईवे पर आना-जाना आसान होगा और टोल ट्रांजैक्शन एक जैसा और ट्रांसपरेंसी आएगी। टोल चोरी या कोई गड़बड़ी होने की संभावना खत्म हो जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक कतारों में खड़े रहने से समय की बर्बादी के अलावा ईंधन का भी नुकसान होता है। एक स्टडी में खुलासा हुआ था कि टोल प्लाजा पर पेमेंट डिजिटल मोड में होने से देश को सालाना 87000 करोड़ रुपए की बचत होगी। कई बार खुले पैसे को लेकर टोल पर आपने ड्राइवर और टोल कर्मी के बीच कहासुनी जैसे घटनाएं हुई, डिजिटल सिस्टम से यह समस्या भी जड़ से खत्म हो जाएगी। सरकार आने वाले समय में बैरियर-फ्री टोलिंग लाना चाहती है। यानी कि गाड़ी जिस रफ्तार पर चल रही है उसी में टोल कट जाएगा। इसके लिए कैशलेस पेमेंट होना बहुत जरूरी है।
