लाखों के इस उपकरण से पुलिस-गोताखोरों का काम होगा आसान….

नई दिल्ली। प्रगति मैदान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय पुलिस एक्सपो में आंतरिक सुरक्षा और आपात स्थिति में राहत बचाव कार्य के लिए लिए एक से बढ़कर एक हथियार, तकनीक और उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें से सोनार आधारित उपकरण पानी के अंदर 50 मीटर फंसे किसी भी इंसान का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पानी की सतह पर रखकर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस उपकरण को कनाडा की कंपनी ने बनाया है। इस उपकरण को खरीदने के लिए भारतीय पुलिस और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों ने रुचि दिखाई है। भारत इस उपकरण को मुंबई की श्री ललिता सेफ्टी नामक कंपनी के द्वारा बेचा जा रहा है।
कैसे काम करती है यह तकनीक
कंपनी के निदेशक हरसिल लालाजी ने बताया कि सोनार आधारित उपकरण में मुख्य रूप पानी के अंदर तीन चीजों की पहचान करने के लिए बनाया गया है। मानव, पानी में जीव-जंतू और धातू। पानी में डूब रहे मानव या उसके शव को सोनार तकनीक त्वचा की जांच से पहचान करेगी। यदि पानी में मानव डूब रहा या फिर शव है तो उपकरण की स्क्रीन में गुणा का निशान बनेगा। यदि पानी में कोई धातु हैं तो उसमें गोल का निशान बनेगा। अगर कोई जीव-जंतू है तो उसमें अलग तरह का निशान बनेगा।
उपकरण से अभी तक कई तरह के परीक्षण किए गए हैं जिसमें 99 प्रतिशत परिणाम सही आएं हैं। यही कारण है कि इस उपकरण को खरीदने के लिए आपातकालीन स्थिति में राहत बचाव का काम करने वाली एजेंसियां रूचि दिखा रही हैं। इस उपकरण की कीमत 10 लाख रुपये के करीब है।
डूब रहे लोगों को बचाएगा मानव रहित रोबोटिक बोट
पानी में डूबने से देश में हर वर्ष हजारों लोगों की मौत होती है। यदि तुरंत राहत बचाव का कार्य शुरू किया जाए और डूबते लोगों तक तुरंत मदद मिल जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है। तुर्किये की एक कंपनी द्वारा बनाई गई रोबोटिक बोट डूबते लोगों की जान बचाएगी। इसे रिमोट से चलाया जा सकता है।
यह बोट छोटी और हल्की है लेकिन 200 किलोग्राम वजन आसानी से उठा सकती है। पानी डूब रहे दो लोगों को यह बोट आसानी से बचा सकती है। 800 मीटर की दूरी पर यह बोट 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पहुंच सकती है। छोटी होने के कारण इसे कोई एक व्यक्ति कहीं भी ले जा सकता है।
रिमोट के साथ ही यह बचाव कर्ता के साथ पीड़ित तक पहुंच सकता है और पीड़ित को सुरक्षित रूप से किनारे पर वापस ला सकता है। इसे विशेष रूप से भारतीय तट रक्षक बल और भारतीय नौसेना सहित समुद्री बचाव के लिए बनाया गया है साथ ही यह बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में भी मूल्यवान हो सकता है।
