बाबा महाकाल से भी पुराना है उज्जैन का यह मंदिर, अपने ही वृद्ध स्वरूप में मौजूद, पहला शिवलिंग प्रकट होने की मान्यता

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व शिव-भक्ति, तप, त्याग और आत्मचिंतन का प्रतीक माना जाता है. भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और रात्रि भर शिव मंत्रों का जाप, ध्यान और भजन-कीर्तन करते हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर आज हम आपको बाबा महाकाल से भी पुराने इस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है उज्जैन की धार्मिक यात्रा…
महाशिवरात्रि का पर्व आने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं, फरवरी की 15 तारीख को यह पर्व मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व शिव-भक्ति, तप, त्याग और आत्मचिंतन का प्रतीक माना जाता है. महाशिवरात्रि के मौके पर देशभर में कई धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं, वहीं उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. उज्जैन का महाकाल मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध दक्षिणमुखी और स्वयंभू मंदिर है. महाकाल मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है, जहां जाने से समय भी बदल जाता है. साथ ही इस धार्मिक शहर में बाबा महाकाल के वृद्ध स्वरुप में मौजूद हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर जानते हैं बाबा महाकाल का वृद्ध स्वरूप के बारे में…
माना जाता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से जीवन में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महाकाल मंदिर में मुख्य गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग से भी पुराना शिवलिंग मंदिर में मौजूद है, जिसके दर्शन के बिना महाकाल की दर्शन यात्रा अधूरी मानी जाती है. उज्जैन के महाकाल मंदिर में कई प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यता है. कुछ मंदिर का निर्माण नए सिरे से किया गया है लेकिन कुछ मंदिर की जड़े प्राचीन काल से जुड़ी हैं.
मंदिर परिसर में महाकाल के दर्शन से पहले वृद्धकालेश्वर महादेव का मंदिर बना है, जिसे मुख्य मंदिर से भी प्राचीन बताया जाता है. मंदिर के गर्भगृह में बाबा महाकाल के प्रतिरूप में शिवलिंग मौजूद हैं और उनका शृंगार प्रतिदिन बाबा महाकाल की तरह ही होता हैं.
वृद्धकालेश्वर महादेव और बाबा महाकाल में फर्क कर पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि शिवलिंग का आकार और रूप दोनों एक जैसे हैं. कहा जाता है कि वृद्धकालेश्वर महादेव, बाबा महाकाल के वृद्ध स्वरुप हैं और उनसे भी ज्यादा प्राचीन हैं. उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन का पुण्य तभी पूरा मिलता है, जब महाकालेश्वर के 'वृद्ध' स्वरूप के दर्शन ना हो जाए. इसलिए भक्त महाकाल के दर्शन के बाद बाबा वृद्धकालेश्वर के दर्शन जरूर करते हैं.
माना यह भी जाता है कि बाबा वृद्धकालेश्वर, महाकाल से भी पुराने हैं और उनसे पहले धरती पर प्रकट हुए थे. हालांकि आक्रमणकारियों की वजह से शिवलिंग और मंदिर दोनों को खंडित करने की कोशिश की गई लेकिन आज भी बाबा वृद्धकालेश्वर अपनी जगह पर स्थापित हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण कर रहे हैं. मंदिर की हालत थोड़ी जर्जर है जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंदिर आक्रमणकारियों का शिकार हुआ था लेकिन साथ ही समय-समय पर मंदिर का रखरखाव भी होता रहता है.
