बंगाल में TMC की लगातार सत्ता, बीजेपी चुनावी मैदान में बदलाव की तैयारी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी तेज हो गई है। चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं, वहीं राजनीतिक दल भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल टीएमसी एक और कार्यकाल के लिए मैदान में डट गई है, वहीं विपक्षी बीजेपी बंगाल में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है। दूसरी ओर वाम मोर्चा भी अपने संगठन को फिर से सक्रिय करते हुए चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने बंगाल में दो चरण में चुनाव कराने की घोषणा की है। इसमें पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। इसके लिए 30 मार्च को अधिसूचना जारी होगी, जबकि नामांकन प्रक्रिया 30 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगी। 7 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। चुनाव की पूरी प्रक्रिया के बाद 4 मई को वोटों की गिनती होगी और नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही सभी दलों ने उम्मीदवारों की घोषणा भी शुरू कर दी है, जिससे राजनीतिक समीकरणों में नई हलचल देखने को मिल रही है। 
बात दें बीजेपी ने सोमवार को विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, जिसमें 144 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए। बीजेपी ने इस सूची में कई प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारा है। पार्टी ने ममता बनर्जी को घेरने के लिए सुवेंदु अधिकारी को दो जगह भवानीपुर और नंदीग्राम से मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में सुवेंदु ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को करीब 2000 वोटों के अंतर से हराया था। इसके अलावा सुवेंदु अग्निमित्र पॉल को आसनसोल दक्षिण सीट से टिकट दिया गया है, जबकि कूचबिहार उत्तर (आरक्षित) से सुकुमार को उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह शीतलकुची (आरक्षित) से साबित्री बरमन और दिनहाटा से अजय रॉय को चुनाव मैदान में उतारा है। बीजेपी की इस सूची में कई पुराने विधायकों को टिकट नहीं दिया है, जिससे पार्टी के अंदर चर्चा का बाजार गर्म है।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक जिन 144 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए गए हैं, उनमें से 48 सीटें पहले बीजेपी के पास थीं। हालांकि इस बार पार्टी ने अपने कई मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है। 40 निवर्तमान विधायकों को ही दोबारा मौका मिला है, जबकि आठ विधायकों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया या उन्हें टिकट नहीं मिला, जिन आठ सीटों पर उम्मीदवार बदले गए हैं, उनमें तीन सीटें उत्तर बंगाल, तीन रहबंगा क्षेत्र और दो दक्षिण बंगाल की हैं।
दूसरी ओर वाम मोर्चे की सबसे बड़ी पार्टी सीपीएम ने भी अपनी प्रारंभिक उम्मीदवार लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें 192 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए हैं. हालांकि इस सूची के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर कुछ सीटों को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं. खास तौर पर मुर्शिदाबाद जिले की रानीनगर सीट पर उम्मीदवार घोषित न किए जाने से पार्टी के अंदर चर्चा तेज हो गई है. पिछले लोकसभा चुनाव में इसी सीट पर पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम को बढ़त मिली थी, इसलिए माना जा रहा था कि वे विधानसभा चुनाव में इसी सीट से मैदान में उतर सकते हैं, लेकिन पार्टी की एक आंतरिक नीति के कारण मामला फिलहाल अटका हुआ है। 
पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार राज्य सचिव मंडल के अधिकांश सदस्य चुनाव नहीं लड़ेंगे और केवल मीनाक्षी मुखर्जी को ही अपवाद के तौर पर हुगली जिले की उत्तरपाड़ा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। इसी नीति के कारण रानीनगर और टॉलीगंज सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए गए हैं। हालांकि पार्टी के अंदर चर्चा है कि अगर वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती टॉलीगंज सीट से चुनाव लड़ने के लिए तैयार होते हैं, तो मोहम्मद सलीम के लिए रनिनगर से चुनाव लड़ने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
खबर है कि सुजन चक्रवर्ती को टॉलीगंज सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन उन्होंने फिलहाल चुनाव लड़ने में रुचि नहीं दिखाई है। उनके करीबी नेताओं का कहना है कि वे संगठन और प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं, न कि चुनावी मैदान में उतरना। हालांकि पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि अंततः वे पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे।

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