अयोध्या पहुंचे सुब्रमण्यम स्वामी का दावा- नवंबर बाद शुरू होगा राम मंदिर का निर्माण

अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद (Ram Janmabhoomi-Babri Masjid) विवाद मामले की सुनवाई जारी है. इस कड़ी में रविवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी रामलला के दरबार में पहुंचे. सुब्रमण्यम स्वामी ने रामलला में दर्शन पूजन किया. दर्शन के बाद पत्रकारों से बातचीत में डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया कि नवंबर बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा. हिंदुओं का मूलभूत अधिकार मुसलमानों की संपत्ति के अधिकार से ऊपर है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों का केवल साधारण अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट भी कहता है मूलभूत अधिकार सर्वोपरि है.

बीजेपी सांसद ने कहा कि राम मंदिर की अधिकांश जमीन सरकार के पास है. सरकार जमीन किसी को भी दे सकती है. सबकुछ प्री-फैब्रिकेटेड है, केवल भव्यता देनी है. नवंबर बाद देश खुशियां बनाएगा. सुब्रमण्यम स्वामी के समर्थकों में जय श्रीराम के नारे लगाए. दरअसल, सुब्रमण्यम स्वामी अपने जन्‍मदिन के अवसर पर अयोध्या के कांची मठ में हवन पूजन भी किया. वहीं, कारसेवक पुरम की गौशाला में गौ सेवा किया.अखाड़ा ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को कहा था कि कब्जा 'पूरी तरह उनका' है, क्योंकि वर्ष 1934 के दंगों के बाद 1949 तक मुस्लिमों को केवल शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत थी और वह भी पुलिस संरक्षण में. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अखाड़ा को विवादित 2.77 एकड़ राम जन्मभूमि-बाबरी भूमि का एक-तिहाई आवंटित किया था. हिंदू संगठन ने कहा था कि पुलिस संरक्षण में शुक्रवार की नमाज पढ़ना अखाड़ा के कब्जे की कानूनी प्रकृति में बदलाव नहीं लाएगा और इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता कि हिंदुओं और मुस्लिमों दोनों का संयुक्त कब्जा था.

सुप्रीम कोर्ट में बोले मुस्लिम पक्षकार

सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड और मूल याचिकाकर्ता एम. सिद्दीक सहित अन्य की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने यह कहते हुए हलफनामे का विरोध किया कि मुस्लिमों ने इसलिए नमाज नहीं पढ़ी, क्योंकि उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई. इस पर पीठ ने कहा, 'आप (अखाड़ा) गैरकानूनी काम नहीं कर सकते और फिर उससे लाभ हासिल करना चाहते हैं. अगर आप अवैध काम नहीं भी करते हैं तो भी आप दूसरों के अवैध कार्यों से फायदा नहीं उठा सकते.' पीठ में न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एसए नजीर भी शामिल हैं.

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