अश्वत्थामा करते हैं इस मंदिर में पूजा!

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में यमुना नदी के तट पर स्थित मां काली के मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां महाभारत काल के अमर पात्र अश्वत्थामा अदृश्य रूप में आकर सबसे पहले पूजा करते हैं। कालीवाहन मंदिर के मुख्य महंत राधेश्याम द्विवेदी का कहना है कि वे करीब 40 साल से इस मंदिर की सेवा कर रहे हैं। हर रात मंदिर को साफ करके बंद करते हैं, इसके बावजूद तड़के जब गर्भगृह खोला जाता है तो मंदिर के भीतर ताजे फूल मिलते हैं। आज तक इस बात का पता नहीं लग सका कि यह फूल वहां कैसे पहुंचते हैं। यही माना जाता है कि अश्वत्थामा मंदिर में पूजा करने आते हैं। कर्मक्षेत्र स्नात्कोत्तर महाविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र शर्मा का कहना है कि इतिहास में कोई भी घटना तब तक प्रामाणिक नहीं मानी जा सकती, जब तक उसके पक्ष में पुरातात्विक, साहित्यिक, ऐतिहासिक साक्ष्य उपलब्ध न हो जाएं। हालांकि, जनश्रुतियों के अनुसार कई बातें समाज में प्रचलित हो जाती हैं। महाभारत ऐतिहासिक ग्रंथ है, लेकिन उसके पात्र अश्वत्थामा का इटावा में काली मंदिर में आकर पूजा करने का कोई प्रत्यक्ष ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैै। यह मंदिर देवी भक्तों का प्रमुख केंद्र है। शैव क्षेत्र होने के कारण इटावा में शिव मंदिरों के साथ मां दुर्गा के मंदिर भी बड़ी सख्या में हैं।
इस मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं 10वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य की हैं।

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