इशरत जहां एनकाउंटर के अधिकारियों की स्थिति: जेल गए, दोष मुक्त हुए, फिर मिला पद

अहमदाबाद. गुजरात समेत पूरे देश में चर्चा में आए सोहराबुद्दीन शेख और इशरत जहां एनकाउंटर मामले में गुजरात के बड़े नेताओं से लेकर उच्चाधिकारियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया गया था। 15 साल की कानूनी लड़ाई के बाद अधिकांश उच्च पुलिस अधिकारी दोष मुक्त हो गए हैं। इन कैरियर में अनेक उतार-चढ़ाव आए हैं। इसमें से कई रिटायर्ड हो गए हैं, तो कई फिर से उच्च पद पर पहुंच गए हैं।
वंजारा-अमीन दोष मुक्त
उल्लेखनीय है कि हाल ही में डीजी वंजारा और एन के अमीन को दोष मुक्त किया गया है। इसी तरह पीपी पांडे इस मामले में आरोपी थे। उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद उन्हें जमानत मिली और गुजरात के इंचार्ज डीजीपी बने। बाद में वे इस केस से दोष मुक्त हो गए।
डीजी वंजारा- इशरत जहां एनकांउटर केस में इन्हें जेल जाना पड़़ा था। जमानत पर छूटने के बाद वे सामाजिक कार्यों से जुड़ गए। उन्हें भी हाल ही में इस मामले में दोष मुक्त किया गया है।
तरुण बारोट- इस मामले में इन्हें भी जेल जाना पड़ा था। जमानत मिलने के बाद उन्हें पुलिस विभाग में एक्सटेंशन मिला और उन्हें डीवायएसपी रेल्वे का पद मिला।
जी एल सिंघल- इस मामले में जब इनकी धरपकड़ हुई, तब उन्हें जमानत भी मिली। इसके बाद उनका प्रमोशन हो गया और डीआईजीपी बने। वर्तमान में वे आईजीपी के रूप में कार्यरत हैं।
डॉ. एन के अमीन- इस मामले में ये जेल गए, जमानत मिली, फिर महिसागर जिले के डीएसपी का चार्ज उन्हेें दिया गया। बहरहाल वे इस मामले से डिस्चार्ज हो गए हैं और उन्होंने सेवानिवृत्ति ले ली है।
मामले की जांच से जुड़े सीट के अधिकारी
इस केस की जांच के लिए सीट की रचना की गई थी। इसमें सीट के प्रमुख के रूप में महाराष्ट्र केडर के आईपीएस सत्यपाल सिंह जब गुजरात केडर के आईपीएस मोहन झा और सतीश वर्मा की जांच टीम में शामिल थे।
सीट के अधिकारियों में से कौन किस पद पर?
सत्यपाल सिंह- एनकाउंटर केस की जांच के लिए बनाई गई जांच कमेटी सीट के अध्यक्ष के रूप में इनकी नियुक्ति की गई। इसके बाद वे रिटायर्ड हो गए। फिर भाजपा से जुड़ गए। 2014 का लोकसभा चुनाव लड़कर केंद्रीय मंत्री बने।
सतीश वर्मा-सीट द्वारा इस मामले की जांच के बाद ये सीबीआई के साथ जुड़ गए। इसके बाद वे सेंट्रल डेपुटेशन पर पूर्वोत्तर राज्य में गए।
मोहन झा- सीट की टीम के तीसरे सदस्य मोहन झा था। सीट की जांच के बाद सीबीाआई को केस सौंपा गया। इसके बाद वे गुजरात पुलिस में डीजीपी एडमिन बने। बहरहाल वे राज्य के जेल प्रमुख हैं।
