इस उंगली से जप करने पर मिलते हैं अनगिनत लाभ

मन इतना चंचल है कि पल भर में ही विश्व के कोने-कोने में घूम आता है और हमें कहां-कहां भटकाता जाता है। मन में असीम इच्छाएं उत्पन्न होने लगती हैं। व्याकुल मन को शांत करने के लिए जप एक उपयोगी माध्यम है। विश्व के सभी आध्यात्मिक कार्यों में जप को शुभ माना गया है। जप अधिकतर मालाओं से ही किए जाते हैं। जप या तो प्रात: किया जाता है या फिर सायंकाल। जप से मानसिक शांति तो मिलती है साथ ही आत्मबल भी बढ़ता है। मानव मंगल के लिए जप बड़ी गंभीरता से, सोच-समझकर किया जाता है।
Mantra japa benefits: जप करमाला के 108 मनकों से किया जाता है जिससे मन की एकाग्रता बनी रहे। गीता में तो जप को यज्ञ का भेद कहा गया है। यौगिक क्रिया में भी जप को लाभप्रद माना गया है। जप से मनोवांछित फल प्राप्त होता है जिस प्रकार यज्ञ विशेष फल प्राप्त करने के लिए किया जाता है उसी प्रकार विविध प्रकार से जप करना भी कल्याणकारी होता है।
How to do japa: जप करते समय माला और उंगलियों का प्रयोग किया जाता है। इस लिए पांचों उंगलियों के महत्व को समझ कर ही जप करना उचित होता है। उंगलियों के पोरों से माला के मनके को फेरने से इंद्रियों और अंगों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
Do chanting mantras work: ऐसी मान्यता है कि अंगूठे से अनेय उंगलियों के साथ जप करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। अनामिका उंगली से जप करने से शुद्धता आती है। कनिष्ठा यानी सबसे छोटी उंगली से जप करने से गुणों का विकास होता है। सुख-समृद्धि के लिए मध्यमा उंगली से जप करना उचित समझा जाता है। जो जप ग्रहों की शांति के लिए किए जाते हैं, उस स्थिति में सूर्य और मंगल के लिए मूंगे की माला शुभ होती है जबकि चंद्र और शुक्र के लिए मोती की माला होनी चाहिए। शनि और केतु के लिए रुद्राक्ष की तथा राहू की शांति के लिए भी रुद्राक्ष की माला शुभ मानी गई है।
