ई-टेंडर घोटाला : आरोपों में घिरे पूर्व मंत्री बोले-पहले ‘घोटाले’ का मतलब तो समझाए सरकार

मध्य प्रदेश में हुए ई- टेंडर घोटाले की आंच शिवराज सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा तक पहुंच गयी है. नरोत्तम उस वक्त जल संसाधन मंत्री थे. घोटाले की जांच आगे बढ़ने पर वो कह रहे हैं कि ये सिर्फ कमलनाथ सरकार की बदले की कार्रवाई है. इससे ज़्यादा और कुछ नहीं.
ई- टेंडर घोटाले में ईओडब्ल्यू ने 5 विभागों में अज्ञात नेताओं और अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. जिन विभागों में करीब 2972 करोड़ के ई-टेंडर घोटाले में एफआईआर हुई है, उनमें पीएचई, पीडब्ल्यूडी और जलसंसाधन विभाग भी शामिल हैं.घोटाले पर मची सियासी घमासान के बाद अब तत्कालीन जल संसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान आया है. उनका कहना है ये केवल बदले और दवाब की राजनीति है. प्रदेश में हाल ही में पड़े आयकर के छापे में जो कुछ हुआ वो सबके सामने है. आयकर छापों के बदले में ई टेंडर मामला उछाला जा रहा है. उन्होंने कहा कमलनाथ सरकार सबसे पहले घोटाले शब्द की व्याख्या करे. यहां जब पैसे का कोई लेनदेने ही नहीं हुआ तो घोटाला किस बात का.नरोत्तम मिश्रा ने साफ कहा कि अधिकारी दबाव में आकर काम न करें और अगर कुछ है तो 4 महीने से दबाकर क्यों बैठे हैं. जो भी बात है साफ कहें,सामने आकर कहें.
