उपचुनाव से पहले अपने सोशल इंजीनियरिंग को दुरुस्त कर रहीं मायावती

उपचुनाव से पहले अपने सोशल इंजीनियरिंग को दुरुस्त कर रहीं मायावती
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की रिक्त हुई 13 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव की रणभेरी बजने से पहले पार्टियां अपनी जुगलबंदी और संगठन के पेंच कसने में जुट गई हैं.
बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर 2007 में मिली जीत को विधानसभा उपचुनाव में दोहराने की कोशिश में है. प्रदेश अध्यक्ष से लेकर लोकसभा तक संगठन में किए गए बदलाव इस बात को पुख्ता कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में विधानसभा की रिक्त हुई 13 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव की रणभेरी बजने से पहले पार्टियां अपनी जुगलबंदी और संगठन के पेंच कसने में जुट गई हैं. बसपा मुखिया मायावती ने इसी कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष आर. एस. कुशवाहा की जिम्मेदारी बढ़ाकर केन्द्रीय यूनिट का महासचिव बनाया है जबकि मुस्लिम चेहरे के रूप में पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया है.
लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर बहुजन समाज पार्टी ने 10 सीटें हासिल की थी हालांकि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा को यूपी से एक भी लोकसभा सीट नसीब नहीं हुई थी. मायावती के लिए उत्तर प्रदेश का विधानसभा उपचुनाव अपने आप में बेहद खास है. खास इसलिए भी है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी इससे पहले कभी विधानसभा का उपचुनाव नहीं लड़ती थी यह पहला मौका होगा जब बहुजन समाज पार्टी पूरे दमखम के साथ विधानसभा उपचुनाव लड़ने के मूड में है.

13 विधानसभा सीटों पर होने हैं चुनाव

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी यूपी लोकसभा चुनाव के दौरान कई विधायक सांसद बन गए जिनकी सीटें खाली हो गई हैं वहीं हमीरपुर की सीट विधायक के जेल जाने के बाद खाली हुई है जबकि फागू चौहान के राज्यपाल बनने के बाद मऊ जिले की 1 सीट भी रिक्त हो गई है. लोकसभा चुनाव के दौरान जो सीटें खाली हुई हैं उनको मिलाकर 13 ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां पर विधानसभा उपचुनाव होना है. परिस्थितियां बदलीं तो संख्या 15 भी हो सकती है.
संख्या बदलने के पीछे वजह है दो विधायकों का दल बदलना. शिवपाल यादव से जुड़ी इटावा की जसवंतनगर और मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट को लेकर सस्पेंस है. शिवपाल यादव सपा से विधायक हैं जबकि अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं. ऐसे में शिकायत हुई तो उनकी सदस्यता जा सकती है. जबकि मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना कांग्रेस के टिकट पर हाल ही में लोकसभा चुनाव लड़े थे. ऐसे में दोनों की शिकायत हुई तो सदस्यता जा सकती है.

बीजेपी को आर्टिकल 370 का लाभ मिलने की उम्मीद
यूपी में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है साथ ही कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल भी खासा बढ़ा हुआ है. ऐसे में बसपा के लिए विधानसभा उपचुनाव की राह आसान नहीं होगी. सपा बसपा गठबंधन टूटने के बाद अखिलेश यादव यूपी के चुनावी समर में फिलहाल अकेले पड़ गए हैं. शिवपाल यादव पहले ही किसी अनजान ड्राईवर द्वारा चलाए जा रहे हैं राजनीति के रथ पर सवार हैं और पूरे दमखम के साथ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में राजनीति की बिसात बिछाने के अलावा किसी का भी खेल बिगाड़ने का काम कर रहे हैं.

सोशल इंजीनियरिंग से 2007 में मिली थी सत्ता

2007 में बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग के जिस फॉर्मूले के साथ चुनाव लड़कर यूपी विधानसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया था उसी फॉर्मूले पर अब संगठन का खाका तैयार किया गया है. मुस्लिम चेहरे को यूपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाकर मायावती ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि दलित और मुस्लिम गठजोड़ यूपी में सियासत की नई इबारत लिख सकता है.

जौनपुर से सांसद बने यादव चेहरे को लोकसभा में बीएसपी दल का नेता बनाया गया है. बसपा ने श्याम सिंह यादव को ये जिम्मेदारी देकर पिछड़ा वोट बैंक साधने की कोशिश की है. अंबेडकर नगर से जिले से ब्राह्मण सांसद को लोकसभा में डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी देकर फॉर्मूला हिट कराने की कोशिश की गई है जबकि दलितों को साधे रखने के लिए लोकसभा में चीफ व्हिप की जिम्मेदारी दलित नेता गिरीशचंद्र जाटव को सौंपी गई है.

दलित-मुस्लिम फ़ॉर्मूले से जीती 10 सीटें

फिलहाल बसपा ने यह कवायद विधानसभा उपचुनाव को लेकर की है. दलित और मुस्लिम फॉर्मूले से बसपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में 10 सीटें हासिल की हैं. ऐसे में विधानसभा उपचुनाव के दौरान सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला बसपा को संजीवनी के रूप में नजर आ रहा है.

जानकार मानते हैं फॉर्मूला हिट हुआ तो मिशन 2022 के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती इस फॉर्मूले को और मजबूत बनाने के लिए कई नए चेहरों को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती हैं. बहरहाल हर किसी की नजर अब चुनाव आयोग की तरफ टिकी हुई है और इंतजार इस बात का है कि विधानसभा उपचुनाव की तारीख कब घोषित होती है.

Leave a Reply