उमड़ा आस्था का जन सेलाब जमीन से 20 फीट ऊँचाई पर उलटा लटककर मनन्तधारीयो ने उतारी मन्नत

उमड़ा आस्था का जन सेलाब
जमीन से 20 फीट ऊँचाई पर उलटा लटककर मनन्तधारीयो ने उतारी मन्नत
पेटलावद। रायपुरिया में हाट बाजार मैदान में प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार धुलेटी वाले दिन दोपहर बाद परंपरागत गल-चुल कार्यक्रम आयोजित हुवा। आयोजित कार्यक्रम को देखने के लिए हजारो की संख्या मे जनसेलाब उमडा । दरअसल आदिवासी समाज अपनी परंपरा को निभाने के लिए इस कार्यक्रम में पहुचते है। कार्यक्रम क्षेत्र का प्रसिद्ध कार्यक्रम होता हे, लिहाजा बुजुर्ग, युवक युवतिया भी इसको लेकर उत्साहित रहती है और यहां गल चूल के कार्यकम को देखने पहुचते है। युवक युवतिया अपनी पारंपरिक वेश् भूषा तो कई आधुनिकता के फेशन मे सज धजकर भी देखने को मिले ।
हजारो आदिवासी पहुचे परंपरा के गवाह बने
हाट बाजार मैदान में सर्वप्रथम मन्नात्धारीयो ने पहले गल देवता की पूजा अर्चना की बाद में मन्नतधारी ने जमीन से 20 -25 फ़ीट उपर रस्सियों के बीच उल्टा लटककर गल देव के चक्कर लगाए ग्राम के सरपंच सुखराम मेड़ा ने भी 25 फिट ऊंची मचान पर उल्टा लटककर ग्राम की सुख समृद्धि के लिए गल के चक्कर लगाए व प्रार्थना की ।आज के दिन ऐसा करने के पीछे मान्यताये हे की उनकी मन्नते पूरी होती हे और घर मे सुख शांति आती हे ! इस कार्यक्रम को देखने के लिए हजारो की संख्या में ग्रामीण आस पास के गांवों से पहुँचे तथा परम्परागत इस आयोजन के गवाह बने । ऐसा ही एक मन्नतधारी गल में घूमने वाले रामनगर निवासी नाथू सिंगाड ने बताया कि मेरी शादी हुए बहुत वर्ष हो गये थे लेकिन मेरे बाल बच्चे नही थे । इलाज करवाया लेकिन निराशा ही मिली फिर मुझे किसी ने बताया कि तू गल देव की मन्नत ले मेने गल देव की मन्नत ली उसके बात मेरे घर आंगन में बच्चों की किलकारी गूंज उठी गल देव ने मेरी मन्नत पूरी की आज में गल घूमने आया। मन्नत धारी को सात दिनों तक कठिन नियमो का पालन करना पड़ता है। सभी भगोरिया हाट में घूमने जाना पड़ता है और अपने हाथों से ही भोजन बनाके खाना पड़ता है। पूरे शरीर पर हल्दी का लेप लगाकर लाल कपड़ा लपेटते है हाथो में नारियल ,कांच ,कंघी रखना पड़ती है ।
