‘एक राष्ट्र एक भाषा’ का समर्थन करके विवादों में घिर गए गुरदास मान, कनाडा में दिया बड़ा बयान

कनाडा के बीसी के एब्सफोर्ड में अपना शो करने से पहले मशहूर गायक गुरदास मान 'एक राष्ट्र एक भाषा' का समर्थन कर विवादों में घिर गए हैं। पंजाब से लेकर कनाडा तक हाय तौबा मच गई है। मान इन दिनों में कनाडा में हैं और उन्होंने दो बार वहां पर एक राष्ट्र एक भाषा का समर्थन किया है। गुरदास मान इन दिनों अपना शो करने के लिए कनाडा गए हैं। उनकी तरफ से वैंकुवर में एक प्रेस वार्ता रखी गई थी।
इसमें एक सवाल के उत्तर में मान ने कहा कि बिल्कुल एक राष्ट्र एक भाषा जरूर होनी चाहिए। उन्होंने पंजाबी को मां बोली कहा तो हिंदी को मौसी की संज्ञा देकर हालांकि बात संभालने की कोशिश की। वहीं वैंकुवर के नामवर रेडियो रेड एफ पर हरजिंदर थिंद ने जब उनका इंटरव्यू लिया तो मान ने दोबारा एक राष्ट्र एक भाषा का समर्थन कर दिया। इसके बाद तो पंजाब से लेकर कनाडा तक हाय तौबा मच गई।

पंजाबी जागृति मंच के महासचिव दीपक बाली का कहना है कि गुरदास मान एक आदरणीय हस्ती हैं लेकिन उनके इस तर्क से मैं सहमत नहीं हूं। भारत की खूबसूरती ही इसी में है कि यहां पर अलग अलग भाषा है, अपना सभ्याचार है। हमारी पंजाबी भाषा ही हमें सभ्याचार के साथ बांधकर रखती है और विरासत को संभाल रही है। अगर हम एक राष्ट्र एक भाषा में आ गए तो हम अपनी संस्कृति से दूर हो जाएंगे।
वहीं कनाडा में पंजाबी बोली के चिंतक गुरप्रीत सिंह सहोता का कहना है कि गुरदास मान आज अगर इस मुकाम पर है तो वह पंजाबी भाषा के कारण है। उनको अपनी बोली व भाषा को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। कनाडा में गुरदास मान का काफी विरोध शुरू हो गया है। हम कनाडा में पंजाबी भाषा को आगे ला रहे हैं लेकिन गुरदास मान ने एक राष्ट्र एक भाषा की हिमायत कर पंजाबी लोगों के दिलों को ठेस पहुंचाई है।

वहीं जीवे पंजाबी आलमी संगत कनाडा के भूपिंदर मल्ली, तर्कशील सोसाइटी कनाडा के अवतार गिल, लोक लिखारी सभा सरी कनाडा की सुखविंदर कौर, पंजाबी साहित्य सभा की इंदरजीत धामी, सिख विचार मंच के केसर सिंह, पंजाबी लैंग्वेज एसोसिएशन के बलवंत संघेड़ा, पंजाबी सभ्याचार मंच के अमरजीत सिंह चाहल, पंजाबी साहित्य सभा एब्सफोर्ड के पवन, आलमी पंजाबी संगत के गुरमुख दयोल, नार्थ अमेरिकन एक्टिविस्ट के धर्म सिंह, विरासत फाउंडेशन के सुच्चा दीपक व पंजाबी साहित्य सभा मुडली के डॉ. गुरविंदर सिंह ने गुरदास मान की हिमायत का विरोध किया है। कनाडा में रविवार को सरींह के ताज बैंक्वेट हॉल में इन जत्थेबंदियों का एक बड़ा कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें इस पर विचार के अलावा अगली रणनीति तय की जाएगी।

 
देश के बेहतरीन गायकों में शुमार हैं मान
गुरदास मान की गिनती देश के बेहतरीन गायकों में होती है। वह छोटे छोटे गांवों के धार्मिक अनुष्ठानों, मेलों आदि में भी अक्सर गाया करते हैं। नकोदर स्थित डेरा बाबा मुराद शाह ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं। इस ट्रस्ट की ओर से उत्तराखंड में जून 2013 में आई बाढ़ के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में उन्होंने 11 लाख रुपये का दान दिया था।

हीर के अपने गायन के माध्यम से संपूर्ण कथा के निर्माण के लिए फिल्म वारिस शाह-इश्क दा वारिस (2006) के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्वगायक का पुरस्कार भी गुरदास मान को मिल चुका है। इसी फिल्म के लिए बर्लिन एशिया फिल्म महोत्सव में गुरदास मान को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला था। एलबम बूटपालिशां के लिए ब्रिटेन एशियाई संगीत पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय एलबम का इनाम भी उनके नाम पर है।

 

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