एनडीआरआई करनाल में पशुओं को फीड देना किया बंद, बीमार पशुओं के दूध के इस्तेमाल पर भी रोक

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के पशुधन अनुसंधान केंद्र में रहस्यमयी तरीके से हुई पशुओं की मौत होने के बाद फीड देना बंद कर दिया है। इसके साथ ही बीमार दुधारू पशुओं के दूध के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। आनन-फानन में संस्थान की ओर से बीमार पशुओं के लिए अलग यार्ड तैयार कराया गया है और उनको वहां पर शिफ्ट किया गया है। साथ ही पुराने यार्ड को कीटाणु मुक्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
बता दें कि एनडीआरआई के केंद्र के 20 एकड़ में बने रिसर्च सेंटर में करीब दो हजार पशु रखे गये हैं, जिन्हें रोजाना 25 क्विंटल फीड दी जाती थी। सभी को वही फीड जा रही थी। दूसरे पशुओं को बीमारी से बचाने के लिये चार तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। तीन तरह से मौत के कारणों को जानने की प्रक्रिया चल रही है। सप्ताहभर से पशुओं के बीमार होने के बाद फीड को बंद करके मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
वैज्ञानिक अभी तक ठोस निर्णय पर नहीं पहुंचे हैं। फिलहाल प्राथमिक जांच में बैक्टीरिया बताया जा रहा है। साथ ही कहा गया कि ये एक प्रकार का इंफेक्शन है। जिससे मानव को किसी प्रकार का भय नहीं है। जेनेटिक डिसीज जानवर से आदमी में आ सकती है, लेकिन इंफेक्शन जेनेटिक नहीं होता।
बताया गया कि 11 सितंबर को बीमारी का पता चलते ही शाम तक लुवास से भी विशेषज्ञों को बुलाया गया था, जो लगातार संपर्क में हैं। जब दोनों केंद्रों के समस्या समझ नहीं आई तो बरेली के केंद्र से वैज्ञानिक 15 सितंबर को पहुंचे गये थे। अब देखना ये है कि तीनों टीमें कब तक बीमारी का पता लगा पाते हैं।
रोकथाम के लिए ये परिवर्तन…
– भ्रमण के लिए आने वाले लोगों को कैटल यार्ड में जाने से रोका
– कैटल यार्ड में सफाई पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बीमारी ना फैले।
– एहतियात के तौर पर सीमन सेंटर और अन्य जगहों से कर्मचारियों को यार्ड की तरफ नहीं जाने दिया जा रहा।
– जिन भैंसों को उपचार दिया जा रहा है, उनका दूध इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।
– सुबह व शाम पांच से सात और दोपहर में 12 से डेढ़ बजे तक दूध निकाला जाता है।
– संस्थान में भ्रमण के आने वाले नागरिकों को फिलहाल कैटल यार्ड में जाने से रोक दिया है, ताकि कोई बैक्टीरिया उनके साथ ना जा पाए।
-बीमार पशुओं के लिए अलग से अस्थायी शेड बनाकर अलग रखा जा रहा है। जहां पर उनका इलाज चल रहा है।
पोस्टमार्टम की प्राथमिक जांच में बैक्टीरिया मौत का कारण
संस्थान के प्रवक्ता एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजन शर्मा ने कहा कि कैटल यार्ड इंचार्ज डॉ. एसएस लठवाल ने 11 सितंबर को सूचना दी थी जब दो भैंसों की मौत हो गई थी। इस मामले में कोई लापरवाही नहीं बरती गई। तभी से संस्थान का पूरा ध्यान इस स्थिति पर ही केंद्रित है। एनडीआरआई में सहयोग के लिए लुवास-हिसार और आईवीआरआई-बरेली के विशेषज्ञों की टीम जांच कर रही है।
कई मृत भैंसों का पोस्टमार्टम किया गया, लेकिन मौत का कोई ठोस कारण नहीं निकला। प्रारंभिक जांच बैक्टीरियल की तरफ इशारा कर रही है। उधर, बता दें कि इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फॉर एनीमल प्रोटेक्शन के अध्यक्ष नरेश कादियान ने पुलिस और मंत्रालय को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि संस्थान में 75 पशुओं की मौत हो चुकी है और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
