कालका-शिमला ट्रैक के बीच दौड़ने वाली हाई स्पीड नैरोगेज विस्टाडोम के प्रोटोटाइप कोच का निर्माण शुरू

रेल मंत्रालय ने आरसीएफ को उत्तर भारत के प्रमुख पर्यटक यात्रा मार्ग कालका-शिमला रेल लाइन के लिए अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं वाले 30 एनजी विस्टाडोम कोचों के निर्माण का जिम्मा सौंपा है। आरसीएफ ने एलएचबी तकनीक पर आधारित नए एनजी कोचों के लिए शुरुआती डिजाइन तैयार किए हैं।

रेल कोच फैक्टरी (आरसीएफ) में कालका-शिमला ट्रैक के बीच दौड़ने वाली हाई स्पीड नैरोगेज (एनजी) विस्टाडोम के प्रोटोटाइप कोच का निर्माण शुरू हो गया है। ट्वॉय ट्रेन के नाम से विख्यात इस ट्रेन की जगह अब हाई स्पीड ट्रेन लेगी। आरसीएफ प्रबंधन ने कोच का डिजाइन बना लिया है और जिस जिग पर इस कोच को हाईस्पीड के लिए मोडिफाई किया जाएगा, वह भी तैयार हो चुका है। मोडिफिकेशन के लिए आरसीएफ ने दो बोगी कालका वर्कशॉप से मंगवाई हैं।

30 कोच बनाने का जिम्मा सौंपा गया
आरसीएफ के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) जितेश कुमार ने बताया कि रेल मंत्रालय ने आरसीएफ को उत्तर भारत के प्रमुख पर्यटक यात्रा मार्ग कालका-शिमला रेल लाइन के लिए अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं वाले 30 एनजी विस्टाडोम कोचों के निर्माण का जिम्मा सौंपा है। आरसीएफ प्रबंधन ने डिजाइन बनाकर जिग भी तैयार कर लिया है, जहां पर विस्टाडोम कोच के जरूरी मापदंडों के अनुरूप हाई स्पीड मोडिफाई करने का काम शुरू कर दिया गया है।

एलएचबी तकनीक के आधार पर तैयार किए हैं डिजाइन
आरसीएफ ने एलएचबी तकनीक पर आधारित नए एनजी कोचों के लिए शुरुआती डिजाइन तैयार किए हैं। इन डिब्बों के लिए स्टेनलेस स्टील के हल्के वजन वाले शेल डिजाइन के अलावा बड़ी खिड़कियों और छत पर शीशे के विस्टाडोम वाले डिजाइन तैयार किए गए हैं। नए शेल के अलावा बोगियों को अपग्रेड करने और ब्रेक सिस्टम में सुधार की योजना बनाई गई है, जिससे गाड़ी की मौजूदा 25/35 किमी प्रति घंटा स्पीड 40/55 किमी तक पहुंच सके। ये कोच सीसीटीवी और फायर अलार्म आदि जैसी आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से भी लैस होंगे।   
 
इन डिब्बों का मुख्य आकर्षण बड़ी और चौड़ी खिड़कियां हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार खोला और बंद किया जा सकता है। हर कोच में यात्री गिलास छत के माध्यम से पहाड़ों को देखने का आनंद उठा सकेंगे। इसके अतिरिक्त इन डिब्बों में आरामदायक सीटों को ट्रेन की दिशा के अनुसार भी 180 डिग्री तक घुमाया जा सकेगा। कोच का अंदरूनी हिस्सा खूबसूरत एफआरपी पैनल से सजा हुआ होगा और प्रत्येक सीट के लिए रेस्तरां की तरह स्नैक टेबल की व्यवस्था और ऑटोमेटिक दरवाजे स्थापित किए जाएंगे ।
 
इन नैरोगेज डिब्बों के निर्माण से कालका-शिमला रेल मार्ग पर मनमोहक दृश्य यात्रियों को देखने को मिलेंगे। जितेश कुमार ने बताया कि इस कोच में यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं प्रदान करने के लिए सामान का ऑर्डर दे दिया गया है। इस साल दिसंबर में पहला प्रोटोटाइप कोच तैयार कर ट्रायल के लिए रेलवे बोर्ड को भेजा जाएगा। रेलवे बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद आरसीएफ एग्जीक्यूटिव एसी चेयर कार, एसी द्वितीय श्रेणी की चेयर कार, जनरल सिटिंग और एसएलआर कोचों की मैन्युफेक्चरिंग शुरू करेगा।

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