कोरोना संक्रमण के कारण प्रभावित हुआ फ्लू टीकाकरण

नई दिल्ली | राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में बढ़ रहे बाल रोगी। डॉक्टरों ने कहा- पिछले साल की तुलना में इस बार बच्चों में यह बीमारी ज्यादा।
कोरोना महामारी और बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन महामारी की पिछली दो लहर की वजह से बच्चों में फ्लू का टीकाकरण कम होने पर बात नहीं हो रही है। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में वायरल निमोनिया ग्रस्त बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अस्पतालों की न सिर्फ ओपीडी बल्कि आईपीडी में भी 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
डॉक्टरों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार बच्चों में वायरल निमोनिया के मामले काफी तेजी से देखने को मिल रहे हैं। आशंका है कि पिछले एक साल में कोरोना महामारी के चलते बच्चों का टीकाकरण कार्यक्रम काफी प्रभावित हुआ है। ऐसे में फ्लू वैक्सीन इनका वायरल निमोनिया से बचाव करता था, लेकिन काफी संख्या में बच्चे यह वैक्सीन नहीं ले पाए हैं। इसलिए छह महीने से अधिक आयु के सभी बच्चों को यह वैक्सीन देना जरूरी है।
मूलचंद अस्पताल के डॉ. संजय सिद्घार्थ ने बताया कि वायरल निमोनिया के मामले मानसून के दौरान अप्रत्याशित नहीं हैं, लेकिन इस बार मामले काफी बढ़ गए हैं। ओपीडी और आपातकाल वार्ड दोनों में वायरल निमोनिया के कारण बाल रोगियों की संख्या बढ़ रही है। खासकर, चार सप्ताह से कम उम्र वाले बच्चों में यह गंभीर स्थिति धारण कर रही है।
नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. विवेक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार वायरल निमोनिया के केस बढ़े हैं। उनके यहां ओपीडी और इमरजेंसी दोनों में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वायरल निमोनिया एक वायरस के कारण फेफड़ों का संक्रमण है। यह सबसे आम फ्लू है, लेकिन सामान्य सर्दी और अन्य वायरस से वायरल निमोनिया भी हो सकता है। वर्तमान में जो स्थिति देखने को मिल रही है वह सीधे तौर पर फ्लू की वजह से ही है।
कलावती सरण अस्पताल की डॉ. मंजू ने बताया कि वायरल निमोनिया से ग्रस्त बच्चों की संख्या बढ़ी है। पिछले दो माह में जन्म लेने के कुछ सप्ताह बाद 12 बच्चे भर्ती हुए हैं, जिनमें यह परेशानी देखने को मिली है।
30 से अधिक भर्ती
एम्स और सफदरजंग अस्पताल के अलावा आरएमएल, कलावती सरण, हिंदूराव और लोकनायक आदि अस्पतालों में पिछले दो महीने के दौरान करीब 30 से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं। यह सभी बच्चे वायरल निमोनिया से ग्रस्त रहे हैं। हिंदूराव अस्पताल में आईसीयू बेड न होने की वजह से बृहस्पतिवार को एक वायरल निमोनिया ग्रस्त बच्चे को मधुकर रेनबो अस्पताल में भर्ती किया गया। यहां बच्चे को ईडब्ल्यूएस श्रेणी में भर्ती कराने के लिए एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने मदद की थी।
माता-पिता ध्यान दें
माता-पिता अपने बच्चों का ध्यान रखें और टीकाकरण जरूर कराएं। 6 महीने की उम्र से सभी बच्चों को तत्काल फ्लू टीकाकरण कराना चाहिए। सभी गर्भवती महिलाओं को भी किसी भी समय टीकाकरण कराना चाहिए, ताकि पहले कुछ महीनों में अपने शिशुओं की सुरक्षा में मदद मिल सके। क्योंकि, उनके लिए शून्य से 6 महीने की उम्र के बीच कोई फ्लू वैक्सीन नहीं है।
