क्या यह भगवाधारी साधु दो मज़बूत दलित नेताओं का कर सकता है मुक़ाबला ?

यह भगवाधारी साधु दो मज़बूत दलित नेताओं के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे- इनमें एक हैं डॉक्टर बाबसाहेब आम्बेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर और दूसरे हैं कांग्रेस के उम्मीदवार सुशील शिंदे. सोलापुर का चुनाव इस साधु के मैदान में कूदने की वजह से काफी दिलचस्प हो गया है.

वैसे तो हर उम्मीदवार मतदाताओं से अपील करता है कि वह घर से बाहर निकलें और भारी संख्या में मतदान करें, पर इस साधु की अपील अजीबोगरीब और विवादास्पद है. यह भगवाधारी महास्वामी एक लिंगायत नेता हैं और सोलापुर से बीजेपी के उम्मीदवार. सोलापुर काफी समय से कांग्रेस का गढ़ रहा है. लेकिन डॉक्टर सिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामी के सोलापुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की वजह से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है.

शिवाचार्य ने हाल ही में एक चुनावी सभा में कहा,“लंबे सप्ताहांत को देखते हुए आप लोग छुट्टी पर न जाएं. अगर आप भगवान का आशीर्वाद लेने पंढरपुर भी जाने की सोच रहे हों, तो आपको यह आशीर्वाद नहीं मिलेगा क्योंकि मैं आपका एक ऐसा भगवान हूँ जो बोल सकता हूँ…”  इस तरह के विवादास्पद बयानों के अलावा वे अपने व्यक्तित्व से एक अलग तरह से भी चर्चा में बने हुए हैं. सिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामी अक्कलकोट के पास गौड़ में एक मठ चलाते हैं. वे वीरशैव लिंगायत जंगम समुदाय के धार्मिक गुरु हैं. उनके अनुयायियों में कन्नड़ और तमिल बोलने वाले लिंगायत समुदाय के साथ-साथ मराठी भाषी लोग भी शामिल हैं.
सिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की है. वे मराठी सहित 3-4 भाषाएं बोल सकते हैं. उनकी हिंदी काफ़ी अच्छी है. अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण वे इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे बाक़ी के दो दिग्गज दलित उम्मीदवारों पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं.

इस सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले दलित नेता हैं सुशील कुमार शिंदे जबकि प्रकाश आम्बेडकर बहुजन वंचित आगाड़ी की टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. प्रकाश डॉ. बीआर आम्बेडकर के पौत्र हैं. बीजेपी ने सिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामी को यहांं से उम्मीदवार बनाने का निर्णय लगभग अंतिम समय में किया और यहां के वर्तमान सांसद शरद बांसोडे को टिकट नहीं दिया. बांसोडे ने पिछली बार 2014 में शिंदे को 150000 मतों के भारी अंतर से हराया था.
बीजेपी ने इस स्वामी का चयन जिस वजह से किया उसके पीछे इस क्षेत्र की जनसंख्या की बनावट प्रमुख कारण है. सोलापुर महाराष्ट्र के दक्षिण-पूर्व में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सीमा पर है. मराठी के साथ-साथ इस क्षेत्र में ग़ैर-मराठी मतदाताओं की संख्या काफ़ी अधिक है. इस क्षेत्र का जातीय समीकरण कुछ ऐसा है जिसकी वजह से यहां से चुनाव जीतना किसी भी उम्मीदवार के लिए कठिन हो जाता है. कुल 17 लाख मतदाताओं में यहाँ मुसलमान 15%, अनुसूचित जाति 13% और 50% से अधिक ओबीसी और वीजेएनटी समुदाय के लोग हैं.
इस लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे सभी तीनों उम्मीदवार अपनी-अपनी जातियों के भरोसे चुनाव की वैतरणी पार करने की आस लगाए बैठे हैं. पर यहां जिस दलित और मुसलमानों के वोट पर कांग्रेस चुनाव जीतती रही है वह बंट सकता है. प्रकाश आम्बेडकर जो कि वंचित बहुजन आगाड़ी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, उनका एमआईएम के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन है जो कांग्रेस के जातीय समीकरण को बिगाड़ सकते हैं और कांग्रेस वोट शेयर यहां नीचे जा सकता है. दूसरी ओर, लिंगायतों की भारी संख्या होने के कारण शिवाचार्य को यहां फ़ायदा हो सकता है.

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