गरीबी से तंग आकर की खुदकुशी, चंदे के पैसे से हुआ अंतिम संस्कार

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां एक व्यक्ति ने गरीबी से तंग आकर आत्महत्या कर ली. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. कहा जा रहा है कि पूरन को कहीं पर काम नहीं मिल रहा था. ऐसे में उसने खुदकुशी कर ली. मृतक पूरन के चार बच्चे हैं, जिनमें बड़ी बेटी रेखा की उम्र 20 साल है.

मामला थाना ढोलना क्षेत्र के कस्बा बिलराम का है

जानकारी के मुताबिक, मामला थाना ढोलना क्षेत्र के कस्बा बिलराम का है. मृतक का नाम पूरन है.  कहा जा रहा है कि पूरन के पास कोई काम नहीं था. काम के तलाश में वह कई दिनों तक कासगंज में चक्कर लगाता रहा लेकिन कहीं भी उसे मजदूरी नहीं मिली. ऐसे में जब वह शाम को मायूस होकर जब घर लौटता था तो वो बच्चों के चेहरे निहारकर टूट जाता था. ऐसे में वह लोगों से कुछ रुपये उधार लेकर काम की तलाश में दिल्ली चला गया.

दिल्ली आकर पूरन ने काम की तलाश की

दिल्ली आकर पूरन ने काम की तलाश की. बदकिस्मती एवं मुफलिसी ने यहां भी उसका पीछा नहीं छोड़ा. तीन दिनों तक वो दिल्ली में काम के लिए दर-दर भटका रहा, लेकिन काम न मिलने पर वो दिल्ली से भी मायूस होकर लौट आया. ऐसे में रात को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

शनिवार को जब पूरन की मौत की खबर प्रशासन को मिली तो मौके पर अफसर पहुंचे. नायब तहसीलदार कीर्ति चौधरी के निर्देश पर परिवार को 20 किलो आटा, 10 किलो चावल और 2 किलो दाल उपलब्ध कराई गई. इसके अतिरिक्त और कोई मुआवजा फिलहाल नहीं दिया गया. नियमों का हवाला देकर परिवार को आश्वासन दिया है कि जो भी संभव होगा प्रशासन मदद करेगा.मृतक पूरन की पत्नी सुनीता पांच माह की गर्भवती है

मृतक पूरन की पत्नी सुनीता पांच माह की गर्भवती है. नियम के अनुसार गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन पोषाहार के रूप में पंजीरी उपलब्ध कराई जाती है. सुनीता की माने तो उसे पंजीरी भी नहीं मिल रही थी। पंजीरी ही मिलती तो भी उसके बच्चे पंजीरी खाकर गुजारा कर लेते. खास बात यह है कि मृतक के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए चंदा करना पड़ा.
 

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