गहलोत पायलट की कुन्मुखी उपचुनाव में कांगे्रस को ले डूबेगी

जयपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजनैतिक दूरदृष्टि दृष्टिकोण को अपनाते हुए राज्य को विकास की गति वाला अनुमानित बजट ना घाटा, ना फायदे वाला सदन में पेश करने के बाद मीडिया के सामने स्वंय कह दिया कि मै जनता की आवाज से मुख्यमंत्री बना हूं…….उक्त शब्दों का अर्थ सीधा तब निकल जाता है जब बजट प्रेस ब्रीफिंग में राज्य के डिप्टी सीएम, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट मुख्यमंत्री के साथ मीडिया के सामने उपस्थित नहीं थे।
जबकि पायलट ने स्वंय मीडिया को ब्रीफिंग करने के लिए अपने विधानसभा कक्ष में बुलाया और मीडिया से ही गहलोत के शब्दों राज्य के कोने कोने से आवाज थी की राजस्थान का नेतृत्व गहलोत ही करें का अर्थ जानना चाहा…….सनद् रहे कि लोकसभा की सभी 25 सीटें हारने के बाद कांग्र्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने नैतिकता के आधार पर अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और राज्यों से भी इस्तीफे पहुंच रहे है राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहां से केवल सहप्रभारी तरूण कुमार ने इस्तीफा दिया है जबकि संगठन का अध्यक्ष होने के नाते सचिन पायलट और मुख्यमंत्री होने के नाते अशोक गहलोत की जिम्मेदारी भी कुछ कम नहीं बनती है सवाल यह है कि अगर दोनो बड़े नेताओं में कुन्मुखी नहीं है तो अलग अलग प्रेस बीफ्रिंग और विकास के नाम पर अलग अलग बयानबाजी और विधानसभा की प्रेस कॉन्फ्रेस में गहलोत का यह कहना कि जनता की आवाज से मै मुख्यमंत्री हूं 101 विधायकों की नुमाइंदगी से मुख्यमंत्री बने गहलोत को कांग्रेस के ही निर्दलीय चुनाव चुनाव 8 विधायकों का समर्थन है तो दूसरी ओर 73 विधायकों वाली भारतीय जनता पार्टी भी अपने आप को सरकार से कुछ कम नहीं मान रही है ऐसे में विधानसभा में जनता के मुद्दो पर होने वाली बहस में दोनो और से तल्खी भरी चर्चा-परिचर्चा देखी जा रही है राजनैतिक विश्लेषक मान रहे है राजस्थान में भी भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक दोहराने के पदचिन्हों पर चल सकती है ऐसे में सत्तारूढ पार्टी के दोनो बडे नेताओं की राजनैतिक कुन्मुखी कोई ना कोई गुल आने वाले दिनों में दिखा दे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। सनद रहे कि राजस्थान में नागौर, मंडावा दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने है ऐसे में कांग्रेस अगर घर की लड़ाई को शांत नहीं कर पाती है तो उपचुनाव में उसकी नैय्या की खिवंया जनता का फैसला किसकी ओर होगा यह भविष्य बतायेगा।
