गुजरात में प्रशस्त किया कृषि क्रांति का एक नया मार्गः मुख्यमंत्री

अहमदाबाद | मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस सुशासन दिवस के अवसर पर राज्यव्यापी किसान कल्याण कार्यक्रमों की शुरुआत करते हुए कहा कि गुजरात में भाजपा की सरकार ने गत दो-ढाई दशक के दौरान कृषि क्रांति का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है। कृषि आधारित नीतियां बनाकर किसान कल्याण का यज्ञ शुरू किया है। उन्होंने साफ कहा कि किसान को सच्चे अर्थ में जगत का तात बनाने के लिए पिछले दो दशक में इस सरकार ने खेती समृद्धि से ग्राम, शहर, राज्य और राष्ट्र समृद्धि की नई दिशा दिखाई है। वे शुक्रवार को गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित राज्यस्तरीय कृषि कल्याण कार्यक्रम से राज्य के 248 तहसील मुख्यालयों पर उपस्थित किसान शक्ति को सेटकॉम के जरिए संबोधित कर रहे थे। सुशासन दिवस के अवसर पर आयोजित इस समारोह में उन्होंने राज्य सरकार की ‘सात पगलां खेड़ूत कल्याण ना’ यानी किसान कल्याण के सात कदम योजना के तहत मुख्यमंत्री फसल भंडारण संरचना योजना, किसान परिवहन योजना, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को गायों के रखरखाव खर्च की सहायता, जीवामृत यानी जैविक खाद बनाने को किट सहायता, छोटे फुटकर विक्रेताओं को वस्तुओं को खराब होने से बचाने को छतरी वितरण, स्मार्ट हैंड रूल किट, तार की कंटीली बाड़ योजना के तहत सब्सिडी और व्यापक कृषि व्यवसाय उन्मुख सहायता का लाभार्थियों को प्रतीक के रूप में वितरण किया। दस गांव के बीच एक चलता-फिरता पशु दवाखाना योजना के तहत मुख्यमंत्री ने 51 मोबाइल डिस्पेंसरी वैन और किसान परिवहन योजना के अंतर्गत 51 छोटे गुड्ज कैरेज वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। समारोह में राज्यभर में 52.67 लाख लाभार्थियों को कृषि कल्याण कार्यक्रम के तहत एक ही दिन में कुल मिलाकर 1120.72 करोड़ रुपए के उपकरण व सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने वर्ष 2014 से सर्वग्राही कल्याण के ऐसे कार्य शुरू किए हैं जिससे किसानों, वंचितों, पीड़ितों और शोषितों को अपनी सरकार होने की अनुभूति हो रही है। मुख्यमंत्री ने अतीत में कांग्रेस के शासनकाल के दौरान किसानों की दुःखद स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने किसानों को पानी, बिजली और बीज से वंचित रखकर जगत के तात को रोने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने कहा कि गुजरात में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और प्रयासों के चलते नर्मदा योजना साकार होने से कच्छ, उत्तर गुजरात और सौराष्ट्र के सुदूरवर्ती गांवों तक खेती, सिंचाई और पीने का पानी पहुंचा है। इस संदर्भ में उन्होंने किसान आंदोलन के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले विरोधियों से सवाल पूछा कि यदि उनके दिल में किसानों और गुजरात का हित समाया था, तो सात-सात बरसों तक नर्मदा बांध पर दरवाजे लगाने की मंजूरी क्यों नहीं दी। रूपाणी ने कहा कि केंद्र में मोदी जी की सरकार बनने के केवल 17 दिनों में ही बांध में दरवाजे लगाने की अनुमति मिल गई थी, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने सात-सात वर्ष तक मंजूरी नहीं देकर गुजरात के किसानों को परेशान और बर्बाद किया। उन्होंने कहा कि गुजरात की भाजपा सरकार ने तो उत्तर गुजरात में सुजलाम सुफलाम योजना, सौराष्ट्र में सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना (सौनी योजना) के माध्यम से 115 जलाशयों को नर्मदा के नीर से भरने का अभियान चलाया है। 700 किलोमीटर दूर तक नर्मदा का पानी पहुंचाकर हमने असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौनी योजना और पाइपलाइन के जरिए नर्मदा का पानी उपलब्ध कराने की बात को मुंगेरीलाल के सपने बताने वालों और उन पाइपों से पानी नहीं बल्कि हवा निकलेगी ऐसा कहने वाले लोगों की ही आज हवा निकल गई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और राज्य सरकार ‘हर हाथ को काम, हर खेत को पानी’ के मंत्र को साकार करने में जुटी है। राज्य के किसानों को पर्याप्त पानी, बिजली, खाद और बीज मुहैया कराकर सक्षम बनाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को रात के समय खेत में पानी देने न जाना पड़े उसके लिए किसान सूर्योदय योजना शुरू की है। उन्होंने कहा कि किसान सूर्योदय योजना के तहत 1055 गांवों में किसानों को अब दिन के दौरान बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। अगले तीन साल में सभी गांवों को इस योजना में शामिल करने का लक्ष्य है। हम ऐसी स्थिति का निर्माण करेंगे जिसमें किसान दिन को काम और रात को विश्राम करेगा। मुख्यमंत्री ने मौजूदा किसान आंदोलन में शामिल राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के इतिहास में ऐसे क्रांतिकारी कृषि सुधार श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने किए हैं उसके चलते उन राजनीतिक दलों के अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं इसलिए ही वे विरोध करने को निकले हैं। उन्होंने साफ किया कि आंदोलन में शामिल पार्टियों ने अतीत में उनके शासनकाल के दौरान समर्थन मूल्य पर खरीदी ही नहीं की थी। गुजरात में इस सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपए से अधिक के कृषि उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा है। यही नहीं, मावठ, चक्रवात और बेमौसमी बारिश के कारण फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को मुआवजे के रूप में 3700 करोड़ रुपए का पैकेज भी दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब किसानों को फसल बीमा का प्रीमियम न भरना पड़े उसके लिए मुख्यमंत्री किसान सहायता योजना शुरू की और ऐसे तमाम किसानों का प्रीमियम सरकार भरती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत सुशासन दिवस पर एक ही दिन में गुजरात के 51.34 लाख किसानों को प्रति किसान 2000 रुपए की सहायता के हिसाब से 1027 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री की ओर से सीधे उनके बैंक खाते में भेजने पर रूपाणी ने हर्ष व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देशभर के किसानों को नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधन को महात्मा मंदिर के मुख्य कार्यक्रम सहित राज्य के 248 स्थलों पर उपस्थित सभी लोगों ने देखा। 
कृषि विभाग के प्रधान सचिव मनीष भारद्वाज ने कहा कि कृषि क्षेत्र में गुजरात हमेशा आगे रहा है। उन्होंने समारोह में उपस्थित विधानसभा अध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी, उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल और मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों का स्वागत किया। भारद्वाज ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्रदान करने के लिए गत चार वर्ष में 15,900 मीट्रिक टन के कृषि उत्पादों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की है साथ ही अबाधित बिजली आपूर्ति, पानी, सिंचाई और बागवानी योजनाओं का लाभ मुहैया कराया है। 

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