गेहूं खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम, किसानों के ‎लिए छांव और पानी की व्यवस्था नहीं

भोपाल । खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं के बीच राजधानी में गुरुवार से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का शुभारंभ हो गया। सुबह शुभ मुहूर्त में तौल-कांटों की पूजा हुई और मिठाई खिलाकर किसानों का मुंह मीठा कराया गया। राजधानी के 72 केंद्रों पर गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू हुई। प्रत्येक केंद्र पर 20-20 किसानों को मैसेज करके बुलाया गया था। पहले दिन कई केंद्रों पर दावों की पोल भी खुल गई। कई केंद्र ऐसे थे, जहां पर पर्याप्त छांव व पानी की व्यवस्था नहीं थी। वहीं अधिकांश किसान-हम्माल मुंह पर मास्क नहीं लगाए हुए थे। ऐसे में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा मंडराता रहा। पिछले साल की तुलना में इस बार 72 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। पिछले साल केंद्रों की संख्या 62 थी, यानी 10 केंद्रों का इजाफा हुआ है। जहां पर पंजीकृत 45 हजार किसान गेहूं बेचेंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए शुस्र्आती दिनों में प्रत्येक केंद्र पर 20 किसानों को बुलाया जा रहा है। बैरसिया के तीन वेयर हाउस में भी खरीदी शुरू हुई। इससे सरकार का परिवहन का खर्च भी बचेगा। अबकी बार पिछले साल की तुलना में अधिक गेहूं खरीदे जाने का अनुमान है। बता दें ‎कि गेहूं खरीदने के लिए सुबह आठ से शाम छह बजे तक टोकन जारी होंगे। रात आठ बजे तक गेहूं की तुलाई हो सकेगी। प्रतिदिन 20-20 किसानों को मोबाइल पर टोकन आएंगे। इसके बाद ही किसान गेहूं लेकर पहुंचे। एफएक्यू मानक का गेहूं ही खरीदा जाएगा। गेहूं पूरी तरह से सूखा हो। नमी, मिट्टी, कुसी, टूटा, बदरंग व क्षतिग्रस्त दाने निर्धारित मात्रा से कम हो। सात दिन में बैंक खातों में राशि जमा होगी। किसी प्रकार की कठिनाई आने पर किसान टोल फ्री नंबर-181 पर शिकायत कर सकते हैं। भैंसाखेड़ी उप मंडी में गुरुवार सुबह 10.30 बजे गेहूं की खरीदी शुरू हो गई। नोडल ऑफिसर आरके शर्मा समेत अन्य ने तौल-कांटों की पूजा-अर्चना की। वहीं ऑपरेटर राजेश बघेल ने लड्डू खिलाकर किसानों का मुंह मीठा कराया। इस केंद्र पर भौंरी सोसायटी के 1009 पंजीकृत किसान गेहूं बेचेंगे। शेड होने के कारण यहां टेंट नहीं लगाए गए हैं। पानी के लिए मटकों की व्यवस्था की गई है, लेकिन कोरोना बचाव के साधन नहीं दिखाई दिए। किसान व हम्माल एक-दूसरे से सटकर ही खड़े रहे।। पीने के पानी के भी उचित प्रबंध नहीं किए गए थे। कोरोना गाइड लाइन का पालन भी होता नहीं दिखाई दिया। कोरोना वायरस से बचाव के ‎लिए मुंह पर मास्क भी नहीं पहना था, जबकि मास्क लगाना अनिवार्य है। शहर से 20 किमी दूर कजलास सोसायटी में दोपहर 12.30 बजे किसानों का अनाज तौला जा रहा था। जिन किसानों का नंबर था, वे तो अपने गेहूं के पास ही खड़े थे, लेकिन जिनका नंबर देरी से आना था, वे शेड व ट्रॉली के नीचे बैठे थे। यहां पर टेंट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखाई दी

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