घुसपैठियों की पहचान के लिए असम बनेगा मॉडल

नई दिल्ली । असम में एनआरसी लागू करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया देश के अन्य इलाकों में घुसपैठियों की पहचान के लिए मॉडल हो सकती है। केंद्र की मंशा है असम में सफलता के बाद पूरे देश में एनआरसी लागू करने की योजना बनाई जाएगी। केंद्र सरकार पहले ही तय कर चुकी है कि घुसपैठियों को चिन्हित करने का काम पूरे देश में होगा। लेकिन इसके पहले सरकार हर तरह की तैयारी कर लेना चाहती है। इस कड़ी में 2020 तक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने का भी फैसला किया जा चुका है। सूत्रों ने कहा कि एनआरसी की सूची प्रकाशित करने के पहले कई स्तरों पर मौके दिए गए हैं। जिन लोगों के नाम अभी भी सूची में नहीं हैं उनके पास भी अभी विदेशी न्यायाधिकरण में अपील का मौका बचा हुआ है। पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद चिन्हित घुसपैठियों को मिल रही सुविधाएं स्वत: समाप्त हो जाएंगी। उन्हें सरकार की कोई भी सुविधा नहीं मिलेगी। उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। शरणार्थी नहीं होने की वजह से उन्हें शरणार्थियों जैसी सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी। उन्हें वापस भेजने के बारे में भी संबंधित सरकारों से बातचीत की जाएगी।
शाह ने दिखाया था कड़ा रुख
गृहमंत्री अमित शाह इस संबंध में सरकार का कड़ा रुख जाहिर कर चुके हें। उन्होंने राज्यसभा में कहा था कि देश के एक एक इंच से अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकाला जाएगा। राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी अवैध घुसपैठियों को चिन्हित करने का जिक्र किया गया था। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने असम में कानून व्यवस्था के मद्देनजर पूरी तैयारी की है। जिन लोगों के नाम सूची में नहीं हैं उन्हें समझाया जा रहा है कि वे कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करें। लेकिन कानून तोडऩे वालों से निपटने के लिए सभी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सरकार हर हाल में एनआरसी को सफल तरीके से लागू करना चाहती है।
