चालू सत्र में सरकारी स्कूलों में ज्यादा बच्‍चों ने लिया प्रवेश

भोपाल । देशव्यापी कोरोना संकट काल के असर से ‎शिक्षा का क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है। दो साल से बंद पडे स्कूल खुले तो रुपए की तंगी के चलते कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को निजी स्‍कूल से निकालकर सरकारी स्कूलों में करा दिया है। यही वजह है ‎कि  दो साल से सरकारी व निजी स्कूलों में बच्चों की प्रवेश की संख्या कम हुई है। रोजगार के लिए दूसरे शहर जाने के कारण भी दो साल में 13 लाख बच्चों का दाखिला कम हुआ है। इस साल पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में पिछले सत्र के मुकाबले निजी स्कूलों में चार लाख कम प्रवेश हुए हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में अधिक प्रवेश हुए हैं। इस सत्र में निजी स्कूलों में पहली से आठवीं तक की कक्षा में 35 लाख और पिछले सत्र में 39 लाख प्रवेश हुए थे। वहीं सरकारी स्‍कूलों में इस सत्र में 65 लाख प्रवेश हुए हैं, जबकि पिछले सत्र में 63 लाख विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था।नौवीं से बारहवीं में सरकारी स्कूलों में 25 लाख तो पिछले सत्र में 23 लाख प्रवेश हुए थे। साथ ही निजी स्कूलों में इस सत्र में 11 लाख बच्चों ने दाखिला लिया है, जबकि पिछले सत्र में 12 लाख ने दाखिला लिया था। यानी उच्च कक्षाओं में एक लाख विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है। बता दें कि इस सत्र में निजी व सरकारी स्कूलों में एक करोड़ 38 लाख बच्चों ने एडमिशन कराया है तो पिछले सत्र में एक करोड़ 37 लाख विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। इसके अलावा बड़े शहरों में भी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। शिक्षाविदों का मानना है कि अभी भी निजी स्कूलों में आनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। फीस के कारण भी बच्चों की संख्या में कमी आई है। वहीं सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं तक की आफलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं। इस बार निजी स्कूलों में प्रवेश कम हुए हैं। पहली से आठवीं तक 35 लाख प्रवेश हुए हैं। पिछले साल 39 लाख बच्चों ने पहली से आठवीं में दाखिला लिया था। कोरोना काल के दौरान भी निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से पूरी फीस वसूली जा रही है। यही कारण है कि इस साल करीब चार लाख बच्चे कम हुए हैं। अभिभावकों का रुझान सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ा है। इस बारे में लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त  अभय वर्मा का कहना है ‎कि सरकारी स्कूलों में बढ़ती सुविधाएं और प्रशिक्षित शिक्षक होने के कारण और कोरोना काल में भी आनलाइन सुचारू रूप से शिक्षण व्यवस्था जारी रखने के कारण सरकारी स्कूलों में नामांकन में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

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